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45 साल से अली खामेनेई ने अपना दाहिना हाथ लबादा के नीचे क्यों छिपाकर रखा था? जानें इसके पीछे की वजह

US Israel attack on Iran: सुप्रीम लीडर बनने से आठ साल पहले जब खामेनेई राष्ट्रपति थे, तब भी उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका दाहिना हाथ खराब हो गया था। 

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भारत

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Ashib Khan

Mar 02, 2026

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ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हुई मौत (Photo-IANS)

Iran Supreme Leader killed: इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। सुप्रीम लीडर की मौत के बाद दुनिया के कई देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रदर्शनकारियों द्वारा नारे लगाए जा रहे हैं।

खामेनेई अपने दाहिने हाथ को लबादा के नीचे छिपाकर रखते थे। इसके पीछे की वजह भी सामने आई है। 

1981 में भी हुआ था जानलेवा हमला

दरअसल, सुप्रीम लीडर बनने से आठ साल पहले जब खामेनेई राष्ट्रपति थे, तब भी उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका दाहिना हाथ खराब हो गया था। 

27 जून 1981 को ईरान‑इराक युद्ध के मोर्चे से लौटने के बाद वे एक मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। नमाज के बाद वे समर्थकों से बातचीत कर रहे थे, तभी एक युवक ने उनके सामने टेबल पर टेप रिकॉर्डर रख दिया और बटन दबा दिया।

करीब एक मिनट बाद रिकॉर्डर से सीटी जैसी आवाज आई और वह विस्फोट के साथ फट गया। बाद में पता चला कि यह हमला फुरकान समूह नामक उग्र विरोधी संगठन ने किया था, जो ईरान की धार्मिक शासन व्यवस्था के खिलाफ था।

स्थायी चोट के बावजूद बने सर्वोच्च नेता

इस हमले में खामेनेई के दाहिने हाथ और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा। कई महीनों के इलाज के बाद वे ठीक तो हुए, लेकिन उनका दाहिना हाथ हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया।

उन्होंने उस समय कहा था कि मुझे इस हाथ की जरूरत नहीं। अगर मेरा दिमाग और जुबान काम करते रहें तो वही काफी है। इसके बाद उन्होंने बाएं हाथ से लिखना सीखा और धीरे-धीरे धार्मिक नेतृत्व के शीर्ष समूह में शामिल हो गए।

35 साल तक किया नेतृत्व

समाचार वेबसाइट Axios के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई ने लगभग 35 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया, जिससे वे दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल हो गए। दरअसल, उनकी मौत को ईरानी शासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे देश के नेतृत्व पर दबाव और बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिका और इज़राइल पहले ही ईरान की सत्ता संरचना को कमजोर करने की बात कह चुके हैं।