
Donald Trump and Ali Khamenei (Photo - Times Of Israel's social media)
Iran-US Nuclear Standoff: ईरान और अमेरिका के बीच गुरुवार को ओमान की मध्यस्थता में जेनेवा में बातचीत हुई, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। ऐसे में मिडिल-ईस्ट में एक और युद्ध का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका ने विमानों और युद्धपोतों का विशाल बेड़ा तैनात कर रखा है।
हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत समाप्त होने से पहले ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है और इसे विदेशों में स्थानांतरित करने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की मांग भी की है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड (Donald Trump) की मांगों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है।
उधर, अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मध्यस्थता कर रहे ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी (Badr al-Busaidi) ने कहा कि तकनीकी स्तर की वार्ता अगले सप्ताह वियना में जारी रहेगी, जहां अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency - IAEA) का मुख्यालय स्थित है। संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी संस्था किसी भी संभावित समझौते में अहम भूमिका निभा सकती है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने ईरानी टीवी से बातचीत में कहा कि यह अमेरिका के साथ अब तक की सबसे गहन और लंबी वार्ताओं में से एक थी। उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि हमारी ओर से जो स्पष्ट करना आवश्यक था, वह कर दिया गया है। व्हाइट हाउस ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने कहा कि ईरान हमेशा अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने की कोशिश करता है। उनके अनुसार, फिलहाल ईरान यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है, लेकिन वह उस स्थिति तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है, जहां वह दोबारा ऐसा कर सके।
ईरान का कहना है कि उसने जून के बाद से संवर्धन नहीं किया है, लेकिन उसने International Atomic Energy Agency (IAEA) के निरीक्षकों को उन स्थलों का दौरा करने से रोक दिया है, जहां अमेरिका ने बमबारी की थी। उपग्रह तस्वीरों में वहां गतिविधियों के संकेत मिले हैं।
यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल रहती है, तो दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है। मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती यदि ईरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है, तो सीमित हमले पर्याप्त साबित नहीं होंगे। लेकिन यदि लक्ष्य ईरान के नेतृत्व को हटाना है, तो अमेरिका को लंबा और व्यापक सैन्य अभियान चलाना पड़ सकता है।
अमेरिकी हमले की धमकी पर ईरान का कहना है कि यदि उस पर हमला किया गया, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जाएगा। इससे हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान खतरे में पड़ सकती है। ईरान ने इजरायल पर भी हमला करने की चेतावनी दी है, जिसका अर्थ है कि मध्य पूर्व में एक बार फिर व्यापक क्षेत्रीय युद्ध भड़क सकता है।
Published on:
27 Feb 2026 09:34 am
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