यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल रहती है, तो दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है। मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती यदि ईरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है, तो सीमित हमले पर्याप्त साबित नहीं होंगे। लेकिन यदि लक्ष्य ईरान के नेतृत्व को हटाना है, तो अमेरिका को लंबा और व्यापक सैन्य अभियान चलाना पड़ सकता है।