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मक्का की रेड लाइन से बाब अल-मन्देब तक…ईरान-अमेरिका युद्ध बन रहा सऊदी क्राउन प्रिंस की परेशानी की वजह

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के लिए परेशानी की वजह बन गया है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Sep 16, 2026

Mohammed bin Salman Al Saud

मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (Photo - ANI)

सऊदी अरब (Saudi Arabia) के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान आल सऊद (Mohammed bin Salman Al Saud) के लिए वर्तमान में चल रहा ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US War) परेशानी की बड़ी वजह बन गया है। इस युद्ध का ही परिणाम है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही (Houthis) लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं। सऊदी अरब भी इसका जवाब दे रहा है, लेकिन हूतियों के हमलों में सऊदी को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

मक्का की रेड लाइन से बाब अल-मन्देब तक बढ़ी परेशानी

मक्का की रेड लाइन से बाब अल-मन्देब तक हूती विद्रोहियों ने आतंक मचा रखा है। अब तक दूसरी जगह हमला कर रहे हूतियों ने मक्का पर भी ड्रोन से हमला कर दिया। हालांकि सऊदी के एयर डिफेंस ने इसे तबाह कर दिया, जिसके कुछ देर बाद ही हूतियों ने सऊदी एयरफोर्स के F-15 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया। मक्का पर हमले को सऊदी सैन्य प्रवक्ता तुर्की अल-मालिकी ने 'रेड लाइन' बताया क्योंकि पवित्र स्थलों पर हमला अस्वीकार्य है और इससे तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को भी खतरा होता है।

हूतियों ने किया दावा खारिज

हूती प्रवक्ता हेज़म अल-असद ने इस दावे को खारिज करते हुए बयान दिया कि मक्का को निशाना बनाने का दावा एक घिसा-पिटा झूठ हैं, जिसका इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है और अब इनसे कोई मूर्ख नहीं बनता।

मक्का पर हमला चिंता का विषय

मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है, जहाँ काबा स्थित है और दुनियाभर के मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं। सऊदी राजशाही की वैधता इन पवित्र स्थलों की सुरक्षा पर निर्भर है। मक्का पर किसी भी हमले से मुस्लिम समुदाय में आक्रोश फैल सकता है और राजनयिक दबाव बढ़ सकता है, जो सऊदी के लिए चिंता का विषय है। मक्का या उसके आस-पास हमला होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं जिन्हें सैन्य और आर्थिक हिसाब-किताब से आसानी से नहीं संभाला जा सकेगा। सऊदी के लिए यह एक बहुत मुश्किल परीक्षा है। उसे यह साबित करना होगा कि वो इन पवित्र स्थलों की सुरक्षा कर सकता है।

साथ ही उसे ऐसी स्थिति से भी बचना होगा जिससे खतरा और बढ़ सकता है। गलती से हुआ हमला भी मुस्लिमों में बदले की भावना और गुस्सा भड़का सकता है। इससे कूटनीतिक मामले भी और गंभीर हो सकते हैं। जो सरकारें अब तक इस जंग से दूर रही हैं, उन पर पवित्र स्थलों की सुरक्षा में मदद करने का दबाव बन सकता है।

बाब अल-मन्देब में गंभीर हो रही स्थिति

बाब अल-मन्देब स्ट्रेट, जिसे आंसुओं का दरवाज़ा भी कहा जाता है, लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच स्वेज मार्ग से गुज़रने वाले जहाजों के लिए यह एक ज़रूरी रास्ता है। हूतियों ने यमन के तट पर मोखा और धबाब पर कब्ज़ा कर लिया है और पेरिम आइलैंड पर भी कब्ज़ा कर लिया है। यह आइलैंड इस स्ट्रेट को दो शिपिंग चैनलों में बांटता है। इन इलाकों पर कब्ज़े से जहाजों को खतरा पहुंचाने की हूतियों की क्षमता और मज़बूत हो गई है।

मोहम्मद बिन सलमान की बढ़ी परेशानी

मक्का पर हमले की वजह से अब मोहम्मद बिन सलमान के सामने परेशानी बढ़ गई है। अगर फिर से ऐसा हुआ तो क्या वह मक्का रक्षा समझौते का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की मदद लेंगे? क्या पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ सऊदी की मदद करेगा? तेल, पर्यटन और मक्का की सुरक्षा मोहम्मद बिन सलमान के लिए चुनौती बन गई है। सऊदी को जंग से बचाने के साथ ही मक्का की सुरक्षा भी सऊदी क्राउन प्रिंस के लिए बेहद अहम है।