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खामेनेई की मौत से होर्मुज की घेराबंदी तक… वो अहम मोड़ जिन्होंने बदला ईरान युद्ध, आज ट्रंप की डेडलाइन

Iran US War Update: खामेनेई की मौत से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी तक, जानें ट्रंप की 6 अप्रैल डेडलाइन से पहले क्या-क्या हुआ?

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भारत

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Rahul Yadav

Apr 06, 2026

Iran US War Update

Iran US War Update (Image: Gemini)

Iran US War Update: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन हालात थमने के बजाय और गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन आज खत्म होने वाली है, जिसके तहत ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को कहा गया था। इस बीच, आइए जानते हैं इस जंग के वे अहम मोड़, जिन्होंने पूरे संघर्ष की दिशा बदल दी।

1. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए। इस दौरान ईरान के कई सैन्य ठिकानों, परमाणु स्थलों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। पहले ही दिन सैकड़ों हमलों की खबर सामने आई, जिससे ईरान के रक्षा ढांचे को बड़ा नुकसान हुआ।

    2. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत

      इन हमलों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में भूचाल ला दिया। इसके बाद ईरान ने बदले की कसम खाते हुए जवाबी कार्रवाई तेज कर दी और इसे सीधा युद्ध घोषित कर दिया।

      3. ईरान का पलटवार और खाड़ी में हमले

        1 मार्च से ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसी दिन कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ की घटना में अमेरिका के तीन F-15 लड़ाकू विमान क्रैश हो गए, हालांकि सभी क्रू सुरक्षित बचा लिए गए।

        4. होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा

          2 मार्च से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान शुरू हो गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा। इसके बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ गई।

          5. हिज्बुल्लाह की एंट्री

            3 मार्च को लेबनान से हिज्बुल्लाह ने भी इस संघर्ष में हिस्सा लिया और इजरायल पर हमले शुरू किए। इसके बाद जंग कई मोर्चों पर फैल गई और क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा गया।

            6. ईरान की होर्मुज बंद करने की धमकी

              6 मार्च को ईरान ने पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी। इसके बाद अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और निगरानी बढ़ा दी।

              7. अमेरिकी विमानों को नुकसान

                संबंधित खबरें

                जंग के दौरान अमेरिकी सैन्य विमानों को भी नुकसान पहुंचा। F-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान को भी निशाना बनाए जाने और नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई। इसके अलावा कई F-15 विमानों के क्रैश और गिराए जाने के दावे भी हुए।

                8. इराक और डिएगो गार्सिया पर हमला

                  8 मार्च को ईरान समर्थित मिलिशिया ने इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद 21 मार्च को ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कोशिश की, जिसे इंटरसेप्ट कर लिया गया। इसी दिन ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, जिसे बाद में बढ़ाकर 6 अप्रैल तक कर दिया गया।

                  9. बातचीत, सीजफायर और जमीनी हमले की अटकलें

                    मार्च के अंत में बातचीत और सीजफायर की खबरें सामने आईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इसी दौरान अमेरिका द्वारा जमीनी हमले (ग्राउंड इनवेजन) की संभावनाओं को लेकर भी अटकलें तेज हो गईं।

                    10. पुल और परमाणु ठिकानों पर हमले

                      2 अप्रैल को अमेरिका ने तेहरान और करज को जोड़ने वाले एक अहम पुल को निशाना बनाया। इसके बाद 4 अप्रैल को ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र के पास हमला हुआ, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई। हालांकि, किसी बड़े रेडिएशन रिसाव की पुष्टि नहीं हुई।

                      11. F-15E क्रैश और हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन

                        ईरान ने अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया। इसके बाद अमेरिका ने अपने पायलटों को बचाने के लिए हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जिसमें भारी गोलीबारी हुई। इस दौरान ईरान ने अमेरिकी हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट विमान गिराने के दावे भी किए।

                        डेडलाइन के बाद क्या?

                        अब सभी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने के बाद क्या होगा? अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोलता है, तो अमेरिका की ओर से बड़े सैन्य कदम उठाए जा सकते हैं?

                        फिलहाल, यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। भारत समेत कई देश लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले कुछ दिन इस जंग के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं और यह तय करेंगे कि तनाव और बढ़ेगा या कूटनीति से कोई समाधान निकलेगा।