
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)
पाकिस्तान में हर नवजात बच्चा जन्म लेते ही 3 लाख 33 हजार रुपये के कर्ज का बोझ लेकर दुनिया में आ रहा है। बिना दूध पिए, बिना स्कूल गए, बच्चा अभी से ही कर्जदार बन चुका है।
देश का कुल सार्वजनिक कर्ज पिछले एक साल में 71 ट्रिलियन से उछलकर 80.5 ट्रिलियन रुपये पहुंच गया है। यानी महज 360 दिनों में 9 ट्रिलियन रुपये का नया कर्ज जुड़ गया है। सरकार इसे आर्थिक स्थिरता का दौर बता रही है, लेकिन हकीकत देखें तो हालात काफी चिंताजनक हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार हर दिन औसतन 26 अरब रुपये उधार ले रही है। इसमें 19 सार्वजनिक छुट्टियां भी शामिल हैं। घंटे के हिसाब से 1.08 अरब रुपये और हर मिनट करीब 18 लाख रुपये का कर्ज बढ़ रहा है।
देश जो भी कमाई करता है, उसके हर 100 रुपये में से 72 रुपये तो सिर्फ पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में चले जाते हैं। स्कूल, अस्पताल, सड़क या कोई दूसरी सार्वजनिक सुविधा के लिए बहुत कम पैसा बच पाता है। कर्ज अब देश की कुल अर्थव्यवस्था (जीडीपी) का 72 प्रतिशत पहुंच चुका है।
इस 9 ट्रिलियन रुपये की बढ़ोतरी में से दो ट्रिलियन रुपये अनुदान बांटने में और दो ट्रिलियन रुपये सरकारी कंपनियों के घाटे को भरने में खर्च हो गए।
बिजली कंपनियां, गैस विभाग, रेलवे, स्टील मिल और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) जैसी बड़ी संस्थाएं लगातार घाटे में चल रही हैं, लेकिन इनमें अभी तक कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा। सरकार के पास 85,500 सरकारी गाड़ियां हैं जो हर साल 114 अरब रुपये का पेट्रोल और डीजल खर्च कर रही हैं।
1971 में पाकिस्तान में पैदा होने वाले एक बच्चे पर राष्ट्रीय कर्ज का हिस्सा सिर्फ 462 रुपये था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 3,33,041 रुपये हो गया है। यानी बच्चा जन्म लेते ही बिना किसी सरकारी मदद लिए कर्जदार बन जाता है।
द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक कर्ज चुकाने में टैक्स का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के हर प्रोग्राम सिर्फ कुछ समय के लिए राहत देते हैं, लेकिन असली सुधार नहीं लाते। अगर पाकिस्तान ने अपनी पुरानी कमजोरियां नहीं सुधारीं तो आगे सुधार का मौका भी नहीं बचेगा।
अर्थशास्त्री और वित्तीय जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि कर्ज का बोझ बढ़ने से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे जरूरी क्षेत्रों में निवेश और भी कम हो जाएगा।
पाकिस्तान आजादी के 79 साल बाद भी चार गवर्नर जनरल, 14 राष्ट्रपति और 20 प्रधानमंत्री बदल चुका है, लेकिन कर्ज बढ़ने की रफ्तार इस पूरे इतिहास में आज सबसे तेज है।
Published on:
06 Apr 2026 09:49 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
