
Indian ship in Strait of Hormuz
Middle East : मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब अपने छठे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बेहद सख्त कर दी है और एक तरह से अघोषित नाकाबंदी कर दी है। हालांकि, इस भारी अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस गंभीर नाकाबंदी के बावजूद कम से कम आठ भारतीय वाणिज्यिक जहाज इस तनावपूर्ण जलमार्ग से बिल्कुल सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं।
समुद्री यातायात के आंकड़ों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले करीब 60 प्रतिशत जहाज इस समय या तो ईरान से आ रहे हैं या उनका गंतव्य ईरान है। अमेरिका के साथ चल रहे कड़े सैन्य टकराव के बाद ईरान ने पश्चिमी देशों के जहाजों पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। लेकिन भारत सरकार की लगातार बातचीत और कूटनीति के चलते भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, ऐसे में यह मार्ग देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
अब तक जो आठ जहाज सुरक्षित निकले हैं, उनमें भारी मात्रा में कच्चे तेल और एलपीजी गैस का परिवहन हो रहा था। इन वाणिज्यिक जहाजों में 'एमटी शिवालिक', 'एमटी नंदा देवी', 'जग लाडकी', 'पाइन गैस', 'जग वसंत', 'बीडब्ल्यू टायर', 'बीडब्ल्यू एल्म' और सबसे हाल ही में गुजरा जहाज 'ग्रीन सान्वी' शामिल हैं। केवल ग्रीन सान्वी ही करीब 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुका है। संयुक्त अरब अमीरात से कच्चा तेल लेकर आने वाला जहाज 'जग लाडकी' और ओमान से अफ्रीका जाने वाला 'जग प्रकाश' भी बिना किसी रुकावट के इस क्षेत्र को पार कर चुके हैं।
इस पूरी स्थिति पर ईरान का आधिकारिक रुख भी सामने आ चुका है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के सदस्य देशों को स्पष्ट कर दिया है कि वे 'गैर-शत्रुतापूर्ण' जहाजों को इस मार्ग से सुरक्षित निकलने की अनुमति देंगे। ईरान की शर्त सिर्फ इतनी है कि इन जहाजों को ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करना होगा। साथ ही, ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायल से जुड़े किसी भी जहाज को इस मार्ग से गुजरने नहीं दिया जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद भारतीय एजेंसियां लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं। केंद्र सरकार और ईरानी अधिकारियों के बीच निरंतर बातचीत जारी है, ताकि भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बिल्कुल भी बाधित न हो। वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को भी इस क्षेत्र के आसपास पूरी तरह से अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नौसेना मर्चेंट नेवी के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है।
इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद अब ईरान लाल सागर के पास स्थित 'बाब अल-मंडेब' जलडमरूमध्य को भी निशाना बनाने की रणनीति पर विचार कर रहा है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं। मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सवाल उठाते हुए कहा है कि दुनिया भर का कितना तेल, गेहूं और चावल इस मार्ग से गुजरता है। अगर ईरान इस अहम रास्ते पर भी नाकाबंदी करता है, तो पूरी दुनिया के सामने आपूर्ति और महंगाई का एक नया संकट खड़ा हो जाएगा।
Published on:
04 Apr 2026 09:04 pm
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