2 सितंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जापान में डर के बदले डिस्काउंट- बढ़ रहे भूतिया घरों के खरीदार, मनहूस घरों की भारी डिमांड

जापान में जिको बुक्केन यानी मनहूस या मौत वाले घरों की डिमांड बढ़ी। कीमतें 10-50% सस्ती, शुद्धिकरण और घोस्ट-फ्री सर्टिफिकेट की सेवाएं भी चल रही हैं।
2 min read
Google source verification
ghost free certification Japan

जापान में बढ़ रही ‘भूतिया’ घरों की बिक्री , photo credit: chat gpt

Haunted Houses Discount Japan: घर खरीदना जीवन के सबसे अहम और बड़े फैसलों में से एक होता है। इसलिए हर कोई घर देखते समय कीमत के साथ ही लोकेशन, रोशनी, हवा और पड़ोस जैसी बातों की तसल्ली करता है, लेकिन सोचिए, ब्रोकर आखिर में धीरे से कह दे कि ‘इस घर में कुछ साल पहले किसी की मौत हुई थी’ तो आपका इरादा बदल जाएगा। थोड़ी देर पहले जो आपको ड्रीम होम नजर आ रहा था, अब डरावना लगने लगा।

दुनिया के कई हिस्सों में ऐसे घरों को रियल एस्टेट की भाषा में ‘स्टिग्माटाइज्ड प्रॉपर्टी’ कहा जाता है। यानी घर में कोई भौतिक खराबी नहीं, लेकिन उसका अतीत लोगों के मन में डर, असहजता या नकारात्मक धारणा पैदा करता है। हालांकि जापान में ऐसे घरों की बिक्री बढ़ी है। वहां ऐसे घरों को जिको बुक्केन कहते हैं। ऐसे घरों की कीमत सामान्य घरों से 10 से 50 प्रतिशत तक कम होती है।

‘भूत’ भगाने का कारोबार भी

जापान में अब इस डर को दूर करने के लिए बाकायदा सेवाएं विकसित हो रही हैं। बौद्ध भिक्षुओं से शुद्धिकरण की रस्में कराई जाती हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञ रातभर घर में रहकर कैमरे, थर्मल कैमरा, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक मीटर और दूसरे उपकरणों से जांच करते हैं। अगर उन्हें कुछ असामान्य नहीं मिलता तो वे घर को ‘घोस्ट-फ्री’ होने का प्रमाण भी देते हैं। जापान में लोगों को ऐसे घर में एक रात बिताने के लिए करीब 88,000 येन यानी लगभग 52 हजार रुपए तक देने की खबर सामने आई। उद्देश्य यही कि कोई व्यक्ति वहां रात गुजारकर दिखाए कि घर में रहने में कोई असामान्य बात नहीं है।

भारत में नहीं है ऐसे घरों का बाजार

भारत में ‘जिको बुक्केन’ जैसी स्थिति नहीं है। यहां लोग इन घरों में रहने से झिझकते हैं। घर की कीमत कम होने के बावजूद खरीदार पीछे हट जाता है। वजह सिर्फ अंधविश्वास नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक असहजता भी होती है। हालांकि दिल्ली में बुराड़ी और आरुषि-हेमराज की हत्या वाला घर बरसों खाली रहने के बाद अब वहां लोग रहने लगे हैं। दिसंबर 2024 में आइआइएम अहमदाबाद में पेश अध्ययन में भारतीय शहरों की संपत्तियों पर ‘स्टिग्मा’ के असर का आकलन किया गया। इसमें पाया गया कि ऐसी घटनाएं मकानों की कीमतें कम करते हैं।

विज्ञान नहीं मानता

भूतिया घर का अर्थ यहां हादसों वाले घरों से है। इन्हें स्टिग्माटाइज्ड (कलंकित) प्रॉपर्टी के रूप में जाना जाता है, यानी ऐसी संपत्ति जिसका अतीत उसकी कीमत को प्रभावित करता है। विज्ञान ऐसी अलौकिक घटनाओं की पुष्टि नहीं करता।