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ट्रंप ने जिस फ्रांसीसी इलाके पर फहराया था अमेरिकी झंडा, वहीं पहुंच रहे मैक्रों, कनाडाई PM से होगी मुलाकात

Emmanuel Macron: मैक्रों सेंट पियरे और मिकेलॉन के दौरे पर कनाडा के PM मार्क कार्नी से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा ट्रंप के अमेरिकी झंडे वाले नक्शे वाले पोस्ट के बाद हो रही है और फ्रांस-कनाडा के बढ़ते संबंधों के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
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भारत

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Pratiksha Gupta

Sep 20, 2026

Donald Trump on Iran Pickaxe Mountain.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- ANI)

Donald Trump Map Controversy: अटलांटिक महासागर में फ्रांस का एक छोटा सा द्वीप है, सेंट पियरे और मिकेलॉन। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों रविवार को इस द्वीप का दौरा करेंगे और वहां कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात इसलिए खास है क्योंकि कुछ ही हफ्ते पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विवादित नक्शा शेयर किया था। उस नक्शे में उन्होंने इस द्वीप पर भी अमेरिकी झंडा दिखा दिया था। उस वक्त तो फ्रांस चुप रहा, लेकिन अब मैक्रों की इस यात्रा को ट्रंप को दिए गए एक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

10 साल बाद किसी फ्रांसीसी राष्ट्रपति का दौरा

साल 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बाद सेंट पियरे और मिकेलॉन पहुंचने वाले इमैनुएल मैक्रों पहले फ्रांसीसी राष्ट्रपति होंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने जा रहे मैक्रों का यह पड़ाव उत्तरी अमेरिका में फ्रांस की संप्रभुता और रणनीतिक पकड़ को नए सिरे से रेखांकित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

क्या था ट्रंप के नक्शे का विवाद?

कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक नक्शा साझा किया था। इस नक्शे में अमेरिका, कनाडा, ग्रीनलैंड, मैक्सिको और कैरेबियाई देशों के साथ-साथ सेंट पियरे और मिकेलॉन जैसे फ्रांसीसी क्षेत्रों को भी अमेरिकी झंडे से ढका हुआ दिखाया गया था। उस समय फ्रांस ने सार्वजनिक रूप से कोई बयानबाजी नहीं की थी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मैक्रों का यह दौरा ही अपने आप में एक बड़ा संदेश है कि फ्रांस अपनी समुद्री संप्रभुता और वैश्विक सीमाओं से कोई समझौता नहीं करेगा।

मैक्रों और कार्नी की बैठक के अहम पहलू

इस द्वीप की आबादी सिर्फ 5,800 है, लेकिन यह फ्रांस के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। वॉशिंगटन के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच कनाडा अब यूरोपीय संघ (EU) के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने में जुटा है, जिसके तहत दोनों नेता इस बैठक के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के रणनीतिक तरीकों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
इसके साथ ही कनाडा यूरोपीय संघ का पहला सहयोगी सदस्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) को लेकर फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों की औपचारिक मंजूरी अभी भी लंबित है, और उम्मीद जताई जा रही है कि इस द्विपक्षीय वार्ता से समझौते में नई प्रगति देखने को मिलेगी।