
क्यूबा का जूरागुआ परमाणु प्लांट। (फोटो- WIKIPEDIA)
Cuba electricity crisis: क्यूबा में शुक्रवार को फिर बिजली गुल हो गई। देश के लाखों लोग अंधेरे में बैठे रहे। यह कोई नई बात नहीं। दशकों से यहां बिजली की कटौती आम है। लेकिन अब स्थिति और खराब हो गई है क्योंकि अमेरिका ने तेल बेचने पर रोक लगा रखी है।
इसी संकट के बीच जूरागुआ नाम की जगह पर एक विशाल कंक्रीट का ढांचा खड़ा है। यह ढांचा कभी परमाणु बिजलीघर बनने वाला था। आज लोग उसमें घूम-फिर सकते हैं। यह अधूरा प्लांट क्यूबा के टूटे सपनों का सबसे बड़ा सबूत बन चुका है।
प्लांट के पास न्यूक्लियर सिटी नाम का छोटा शहर बसा था। वहां हजारों मजदूरों के लिए घर बनाए गए थे। आज वह शहर भी वीरान सा लगता है।
बिजली मिस्त्री लुइस वर्गास ने सीएनएन को बताया- जब मैं उस ढांचे को देखता हूं तो दिल में बहुत दुख होता है। करोड़ों रुपये खर्च हुए लेकिन काम अधूरा रह गया।
फ्रांसिस्को पेरेज भी उसी प्लांट में काम करते थे। उन्होंने याद किया कि कैसे फिदेल कास्त्रो खुद आकर बताया था कि प्लांट बंद करना पड़ेगा। कास्त्रो ने साफ कहा था कि हालात बहुत खराब हैं।
1980 के दशक की शुरुआत में कास्त्रो ने सोवियत संघ की मदद से यह परमाणु प्लांट बनाने का फैसला किया था। योजना थी कि तीन प्लांट बनेंगे। पहला ही 15 फीसदी बिजली दे देगा।
क्यूबा तेल पर निर्भर था और घरेलू उत्पादन कम था। इसलिए परमाणु ऊर्जा से मुक्ति का सपना देखा गया। लेकिन अमेरिका ने विरोध किया। उसने सुरक्षा का हवाला दिया क्योंकि प्लांट अमेरिका के करीब था। 1986 में चेरनोबिल हादसा हुआ तो विरोध और बढ़ गया।
हालांकि अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी कहा था कि जूरागुआ का डिजाइन चेरनोबिल से अलग है। असली झटका 1989 में सोवियत संघ के टूटने से लगा। तीन साल बाद प्लांट हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
बाद में रूस और क्यूबा ने कई बार दोबारा शुरू करने की कोशिश की लेकिन पैसे की कमी और अमेरिकी आपत्ति के कारण कुछ नहीं हो सका। 2000 के आसपास कास्त्रो ने खुद कह दिया कि अब दिलचस्पी नहीं है।
आज अमेरिका में 94 परमाणु रिएक्टर चल रहे हैं जो 18-20 फीसदी बिजली देते हैं। कनाडा, अर्जेंटीना, मेक्सिको और ब्राजील भी परमाणु ऊर्जा इस्तेमाल कर रहे हैं। ब्राजील के दो रिएक्टर करीब 2000 मेगावाट बिजली बना सकते हैं। यही वह कमी है जो क्यूबा इन दिनों झेल रहा है।
क्यूबा की बिजली मांग बढ़ती जा रही है लेकिन पैदावार नहीं हो पा रही। जूरागुआ के उस बड़े ढांचे पर अभी भी रूसी और स्पेनिश में लिखा बोर्ड दिखता है। समय बीत गया लेकिन सपना अधूरा रह गया। क्यूबा आज भी उसी समस्या से जूझ रहा है जिससे दशकों पहले जूझ रहा था।
Updated on:
20 Sept 2026 09:40 am
Published on:
20 Sept 2026 09:40 am
