3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

PoJK में सुरक्षा बलों की ज्यादती पर महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान सरकार को घेरा, बोलीं- ‘तस्वीरें बेहद दिल दहला देने वाली’

PoJK में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि तस्वीरें बेहद दिल दहला देने वाली हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से संवाद की अपील की।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Satya Brat Tripathi

•

Updated: 30 Jul 2026, 3:06 PM IST

Mehbooba Mufti on PoJK violence.

पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती। (फोटो-IANS)

Mehbooba Mufti on PoJK violence: PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के रावलकोट में बढ़ती हिंसा और प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से अधिक मानवीय रवैया अपनाने की अपील की। सोशल मीडिया एक्स पर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर गोलियां चलाई जा रही हैं। उन्होंने लिखा, 'एलओसी के उस पार कश्मीर के दूसरे हिस्से से आ रही तस्वीरें बेहद दिल दहला देने वाली हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ जिस तरह की बर्बरता की जा रही है, उसे देखकर बेहद पीड़ा होती है।' महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान सरकार से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी बंद करने की अपील की।

'बल प्रयोग की जगह संवाद का रास्ता चुने पाकिस्तान'

महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा, 'पाकिस्तान सरकार को अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और बल प्रयोग की जगह संवाद का रास्ता चुनना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों की मांगें वास्तविक हैं और उन्हें सुना जाना चाहिए। कोई भी देश अपने ही लोगों को अधिकारों से वंचित कर या बंदूक के दम पर उनकी आवाज दबाकर मजबूत नहीं बन सकता। सरकार को दमनात्मक कार्रवाई तुरंत बंद करनी चाहिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना रोकना चाहिए। कश्मीर के लोगों को सम्मान, न्याय और अपनी बात कहने का अधिकार मिलना चाहिए, दमन नहीं।'

महबूबा मुफ्ती की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब गुरुवार को भी रावलकोट (PoJK) के डी-चौक पर प्रदर्शन जारी रहे। इस दौरान जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) से जुड़े सोशल मीडिया खातों ने सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी और लोगों की हत्या करने के आरोप लगाए हैं। जेकेजेएएसी से जुड़े सोशल मीडिया खातों के अनुसार, प्रदर्शनकारी पिछले कई दिनों से डी-चौक पर धरना दे रहे हैं। वे लंबा मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं और सुरक्षा बलों पर बर्बरता औरर 'टारगेट किलिंग' के आरोप लगा रहे हैं।

इन खातों द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि इमारतों में तैनात हथियारबंद सुरक्षाकर्मी निहत्थे नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। प्रदर्शनकारी ने कहा, 'जो लोग मारे गए, उनमें से अधिकांश के सिर में गोली मारी गई। हमने ऐसी चीजें सिर्फ खेलों में देखी थीं। हमें नहीं पता था कि हमारे साथ भी ऐसा किया जाएगा।'

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग में 19 की मौत का दावा

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 27 जुलाई को रावलकोट में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। वहीं, कोटली में प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच झड़प में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की भी मौत हुई थी।

संगठन के मुताबिक, जेएएसी का दावा है कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में 19 लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। हालांकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में हताहतों की पुष्टि की गई है, लेकिन मृतकों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि उसके दो जवान घायल हुए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने यह भी कहा कि 5 जून से इस क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं।

संगठन के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि चुनाव से पहले की अवधि में कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल हैं।