
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo Credit - IANS)
Geopolitics: दुनिया भर की नजरें इस वक्त मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई हैं , जहाँ हालात बेहद नाजुक दौर में पहुँच गए हैं। एक तरफ जहाँ कूटनीतिक स्तर पर शांति की कोशिशें तेज हो गई हैं, वहीं जमीनी स्तर पर तबाही का खौफनाक मंजर जारी है। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप अब ग्लोबल एक्शन मोड में आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान की ओर से हाल ही में पेश की गई एक नई '14-सूत्री शांति योजना' की बेहद बारीकी से समीक्षा करने जा रहा है।
ईरान ने अपने इस नए प्रस्ताव के ज़रिए कूटनीतिक दांव चला है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस 14-सूत्रीय मास्टरप्लान में गाजा और लेबनान में तत्काल युद्धविराम, पश्चिमी देशों के साथ परमाणु गतिरोध को सुलझाने पर नई बातचीत और क्षेत्र में सभी देशों के लिए सुरक्षा की गारंटी जैसे अहम बिंदु शामिल हो सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप का इस योजना पर विचार करने के लिए तैयार होना यह दर्शाता है कि वह अपनी कूटनीति के ज़रिए इस दशकों पुराने संघर्ष का कोई नया और स्थायी समाधान निकालना चाहते हैं।
एक ओर जहाँ कागजों पर शांति की रूपरेखा खींची जा रही है, वहीं दूसरी ओर इजरायल ने अपने सैन्य अभियानों में कोई ढील नहीं दी है। बीती रात इजरायली वायुसेना ने लेबनान के कई अहम और घनी आबादी वाले ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की। इस अप्रत्याशित हमले से लेबनान के कई इलाकों में भारी तबाही मची है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) का स्पष्ट रुख है कि वे अपनी उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को जड़ से खत्म करके ही दम लेंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी लंबी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।
इस दोहरे घटनाक्रम ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र ने लेबनान में हो रहे खून-खराबे पर गहरी चिंता जताते हुए तत्काल सीजफायर की अपील की है। वहीं, खाड़ी देशों के नेताओं ने अमेरिका से मांग की है कि वह इजरायल की आक्रामकता पर लगाम लगाए और ईरान के शांति प्रस्ताव को एक अवसर के रूप में देखे।
अब सबकी नजरें ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर हैं। आने वाले 48 घंटों में ट्रंप की टीम इस 14-सूत्री प्रस्ताव को लेकर इजरायल और सऊदी अरब जैसे अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ एक हाई-लेवल सीक्रेट मीटिंग कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी लेबनान के मौजूदा हालात पर एक आपातकालीन सत्र बुलाए जाने की पूरी संभावना है।
इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा और खतरनाक असर ग्लोबल इकोनॉमी पर देखने को मिल रहा है। युद्ध के विस्तार के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आना शुरू हो गया है। अगर यह संघर्ष जल्दी नहीं थमा, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह चरमरा सकती है, जिससे दुनिया भर के आम लोगों को एक बार फिर भयंकर महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
Updated on:
03 May 2026 02:43 pm
Published on:
03 May 2026 02:42 pm
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