
सांकेतिक AI इमेज
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के प्रमुख जारेड आइजैकमैन ने हाल में नई बहस शुरू कर दी है। NASA के प्रमुख जारेड आइजैकमैन ने कहा- वे इस विचार के पक्ष में हैं कि प्लूटो को फिर से ग्रह माना जाना चाहिए। 28 अप्रैल को अमरीकी सीनेट की समिति के सामने सुनवाई के दौरान प्लूटो को लेकर सवाल पूछने पर उन्होंने कहा- वे प्लूटो को फिर से ग्रह बनाना चाहते हैं। NASA प्रमुख के इस बयान के बाद पूरी दुनिया में प्लूटो चर्चा का विषय बना हुआ है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के प्रमुख जारेड आइजैकमैन ने कहा कि वे प्लूटो को फिर से ग्रह बनाना चाहते हैं। जारेड आइजैकमैन के मुताबिक, NASA इस विषय पर कुछ शोध-पत्र तैयार कर रहा है। इन शोध पत्रों को वैज्ञानिकों तक पहुंचाया जाएगा। NASA चीफ के बयान के बाद पूरी दुनिया में प्लूटो पर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लूटो का दर्जा बदलना इतना आसान नहीं है। इसका अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) करेगा। यह वही संस्था है, जो अंतरिक्ष में मौजूद ग्रहों और खगोलीय पिंडों की आधिकारिक परिभाषा तय करती है।
अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने साल 2006 में प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाकर 'बौना ग्रह' घोषित किया था। तमाम लोग IAU के इस फैसले को गलत या असंगत मानते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक समुदाय का बड़ा हिस्सा इसे सही मानता है, क्योंकि प्लूटो ग्रह होने की सारी शर्तें पूरी नहीं करता है। अब फिर से इसे ग्रह घोषित करने की मांग उठी है।
IAU के प्रवक्ता रामासामी वेणुगोपाल का कहना है कि लोगों को लगता है, प्लूटो को बौना ग्रह का दर्जा देना, उसका डिमोशन करना है, लेकिन यह सही नहीं है। वेणुगोपाल के अनुसार, प्लूटो वास्तव में बौने ग्रहों में एक नए वर्ग के खगोलीय पिंडों का प्रमुख उदाहरण बन गया है। प्लूटो के अलावा एरिस, सेरेस, हाउमिया, माकेमाके भी बौने ग्रह हैं।
अंतरिक्ष में प्लूटो की खोज 1930 में खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबॉ ने की थी। इसका नाम यूनानी पौराणिक कथाओं के पाताल लोक के देवता 'प्लूटो' के नाम पर रखा गया है। काफी लंबे समय तक इसे सौरमंडल का 9वां ग्रह माना जाता रहा, लेकिन 2006 में इसे ग्रह की सूची से हटा दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ के नियमों के अनुसार, किसी भी खगोलीय पिंड को ग्रह कहलाने के लिए 3 शर्तें पूरी करनी होती हैं। पहली, वह सूर्य की परिक्रमा करे। दूसरी, आकार में पर्याप्त बड़ा हो, ताकि गोल आकार ले सके। तीसरी शर्त है कि अंतरिक्ष में मौजूद कोई भी पिंड अपनी कक्षा के आसपास मौजूद मलबे को साफ कर सके। प्लूटो पहली 2 शर्तें पूरी करता है, लेकिन तीसरी शर्त पूरी नहीं करता।
Updated on:
30 Apr 2026 03:14 am
Published on:
30 Apr 2026 02:53 am
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