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Nepal Floods: बाढ़ में बह गईं 2 बेटी और पत्नी, शख्स ने रोते हुए कहा- लाशें तक नहीं मिलीं, पूरा परिवार खत्म हो गया

Nepal Flood News: नेपाल की भयंकर बाढ़ में 27 साल के बाम बहादुर घले की पत्नी और दोनों बेटियां बह गईं। घर-गांव सब तबाह हो गए, लाशें भी नहीं मिलीं।
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भारत

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Mukul Kumar

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Updated: 1 Sep 2026, 4:02 PM IST

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नेपाल में बाढ़ ने मचाई तबाही (Photo-IANS)

नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया है। कई लोगों के घर, गांव और रिश्तेदार सब कुछ पानी में बह गए। अब बचे हुए लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। बच्चों के पास पढ़ाई का सामान नहीं है। वहीं, नई माताओं को पौष्टिक खाना तक नहीं मिल पा रहा है।

27 साल के बाम बहादुर घले की पत्नी सोम माया और दोनों बेटियां बिनुसा व सुनीता बाढ़ में बह गईं। घर पर नहीं होने की वजह से वे बच गए। द काठमांडू पोस्ट को बहादुर घले ने रोते हुए बताया- अब मेरे परिवार में कोई नहीं बचा। घर, गांव और रिश्तेदार तक नहीं बचे। लाशें भी नहीं मिलीं। बाम बहादुर ने आगे कहा- कभी-कभी सोचता हूं कि परिवार के साथ होते तो कम से कम इस दर्द को नहीं झेलना पड़ता।

भूकंप से निकले तो बाढ़ में फंसे

42 साल के छेगु लामा 2015 के भूकंप से बचे थे। उसके बाद परिवार खल्टे नदी किनारे बस गया। सरकार ने कहा था कि जगह सुरक्षित नहीं है, कहीं और शिफ्ट करेंगे। लेकिन कोई इंतजाम नहीं हुआ।

इस बाढ़ में उनकी बहन कैसांग बुटी, दो जीजा, पिता सोनम, मां योसोंग माया, छोटा भाई उज्जेन सिंह तामांग और भतीजा दिनेश लापता हैं। लामा अब लहरेपौवा के होल्डिंग सेंटर में हैं। लामा ने बताया- भूकंप के बाद भी यही जगह थी, अब बाढ़ ने बाकी सब छीन लिया।

एक हजार घर प्रभावित, आंकड़े अभी पूरे नहीं

इस बीच, कलिका गांवपालिका-3 के सामाजिक कार्यकर्ता विश्वास नेपाली ने बताया कि उत्तरागया गांवपालिका के अलग-अलग वार्ड में करीब एक हजार घर प्रभावित हुए हैं।

माइलुंग (वार्ड 1), पहिरेबेसी (वार्ड 4) और खल्टे (वार्ड 5) सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई लोग सिर्फ जान बचाकर निकले। कपड़े नहीं, बच्चों के किताब-कॉपी नहीं। स्कूलों को अस्थायी शिविर बना दिया गया है। पांच होल्डिंग सेंटर चल रहे हैं, जहां छात्र, बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष अलग-अलग हैं।

स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने की उम्मीद

नेपाली ने आगे कहा- स्थानीय प्रशासन अभी भी बचाव और शव प्रबंधन में लगा है। सरकारी राहत कुछ जगह पहुंची है, बाकी संगठनों और लोगों का सामान स्थानीय स्तर पर बांटा जा रहा है। अगर लोग लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी। अगला कदम अस्थायी पुनर्वास होना चाहिए।