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तो इसलिए नेतन्याहू ने ईरान के साथ आनन-फानन में छेड़ दी जंग, वजह तेल-परमाणु नहीं बल्कि उससे भी ज्यादा खतरनाक

US-इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े हमले शुरू किए, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू की व्यक्तिगत कानूनी मुश्किलें इस युद्ध की एक बड़ी वजह हैं, ट्रंप ने भी हर्जोग पर दबाव डाला कि प्रधानमंत्री को माफी दें।

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Benjamin Netanyahu

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (इमेज सोर्स: ANI)

Israel Iran War: इजराइल और अमेरिका के बीच ईरान के साथ चल रही जंग अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या सहित कई उच्च अधिकारी मारे गए। आधिकारिक तौर पर यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी हमलों को रोकने के लिए 'प्री-एम्प्टिव' बताया गया है। लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषकों का दावा है कि नेतन्याहू के लिए यह युद्ध व्यक्तिगत राजनीतिक बचाव का एक माध्यम भी है।

नेतन्याहू पर दर्ज है तीन भ्रष्टाचार के मामलें

आपको बता दें कि नेतन्याहू 2019 से तीन भ्रष्टाचार मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं, जिसमें रिश्वत, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप हैं। अगर दोषी पाए गए तो उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है। युद्ध शुरू होने से पहले ही, नवंबर 2025 में उन्होंने राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से माफी की मांग की थी, लेकिन हर्जोग ने इसे कानूनी समीक्षा में रखा है। युद्ध के दौरान ट्रंप ने कई बार हर्ज़ोग पर हमला बोला, उन्हें "डिसग्रेस" और "वीक" कहते हुए तुरंत माफी देने की मांग की, ताकि नेतन्याहू युद्ध पर पूरा ध्यान दे सकें।

जंग के 12 दिन पहले क्या हुआ था

12 मार्च 2026 को युद्ध शुरू होने के 12 दिन बाद नेतन्याहू ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुकदमों को 'एब्सर्ड सर्कस' बताया और हर्जोग से सही काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर्जोग को इजराइल को समय देना चाहिए, मुझे समय देना चाहिए ताकि मैं दुश्मनों को हराऊं और क्षेत्र में शांति, समृद्धि और गठबंधन बना सकूं।' ट्रंप ने भी 5 मार्च को कहा कि नेतन्याहू को केवल ईरान से लड़ाई पर फोकस करना चाहिए, न कि कोर्ट केस पर।

युद्ध की वजह से मुकदमें बार बार-बार स्थगन

विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध ने मुकदमों में बार-बार स्थगन कराया है। पहले गाजा युद्ध के दौरान भी इसी तरह के स्थगन हुए थे। अब ईरान युद्ध के बहाने नेतन्याहू कोर्ट में पेश होने से बच रहे हैं। कुछ का मानना है कि यह 'वॉर टू एवॉइड जेल' जैसी रणनीति है, जहां युद्ध व्यक्तिगत संकट से ध्यान हटाने और सत्ता मजबूत करने का हथियार बन गया है।

युद्ध से बढ़ी क्रूड ऑयल कीमतें

हालांकि, इजराइल सरकार इसे खारिज करती है और कहती है कि हमले ईरान की मौजूदा खतरों के खिलाफ जरूरी थे। ईरान ने जवाबी हमले किए हैं, लेकिन उसकी क्षमता कमजोर हुई है। युद्ध से क्रूड ऑयल कीमतें बढ़ी हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो नेतन्याहू की कानूनी स्थिति और मजबूत हो सकती है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी। फिलहाल, हर्ज़ोग ने माफी पर कोई फैसला नहीं लिया है, और मुकदमे की सुनवाई प्रभावित हो रही है।