
भारतवंशी जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर बने हैं। (फोटो: Washington Post)
Zohran Mamdani: न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने UAPA मामले के तहत जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद को खत भेजा है। जोहरान ने खालिद से कहा कि प्रिय उमर, मैं अक्सर कड़वाहट के बारे में तुम्हारी बातों को सोचता हूं, और इस बात की अहमियत को कि इसे खुद पर हावी न होने दिया जाए। तुम्हारे माता-पिता से मिलकर अच्छा लगा। हम सब तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं।
34 वर्षीय ममदानी पिछले साल न्यूयॉर्क के पहले एशियाई अमेरिकी और मुस्लिम मेयर बने थे। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने कुरान पर हाथ रखकर मेयर पद की शपथ ली थी। मेयर जोहरान से खालिद के माता-पिता ने अमेरिकी यात्रा के दौरान मुलाकात की थी।
खालिद की पार्टनर बनोज्योत्सना लहिड़ी ने X पर एक पोस्ट में नोट की एक फोटो शेयर की। लाहिड़ी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि उमर के माता-पिता, साहिबा खानम और सैयद कासिम रसूल इलियास, अपनी सबसे छोटी बेटी की शादी से ठीक पहले अमेरिका गए थे ताकि अपनी एक बड़ी बेटी से मिल सकें जो वहां रहती है, क्योंकि वह शादी में शामिल नहीं हो पा रही थी।
उन्होंने कहा कि वे अमेरिका में ममदानी और कुछ अन्य लोगों से मिले और उनके साथ काफी समय बिताया। तभी उन्होंने यह नोट लिखा। खालिद को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार किया है। वह 2020 से गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धाराओं के तहत जेल में हैं। खालिद को दिसंबर में अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी।
लहिड़ी ने बताया कि उमर ने अपना सारा समय घर पर बिताया, क्योंकि उनकी जमानत की शर्तों के अनुसार उन्हें बाहर जाने की इजाजत नहीं थी, लेकिन यह समय बहुत जल्दी बीत गया, जैसा कि पहले दो बार भी हुआ था। जब वह जमानत पर बाहर थे। उन्होंने घर का बना खाना खाया जो उनकी मां अक्सर उन्हें खिलाती थीं और उन्होंने अपने भतीजे-भतीजियों के साथ बहुत समय बिताया।
साल भर पहले न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में ममदानी ने खालिद के लिखे एक पत्र को पढ़कर सुनाया था। इसमें उन्होंने कहा था कि वह खुद को यह समझाने की कोशिश करते रहते हैं कि अपनी परिस्थितियों को लेकर कड़वाहट महसूस न करें और उन्हें एक बड़े नजरिए से देखें।
इसी बीच अमेरिकी कांग्रेस सदस्य जेम्स पी मैकगवर्न ने अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पत्र लिखकर 2020 के दिल्ली दंगों के सिलसिले में आरोपी लोगों की सुनवाई से पहले की कैद पर चिंता जताई है। अपने लेटर में मैकगवर्न ने कहा, "कथित तौर पर हिंसा भड़काने के लिए, अधिकारियों ने उमर खालिद और अन्य मुस्लिम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ आरोप लगाए हैं। मानवाधिकार संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और ग्लोबल मीडिया ने जांच और कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। प्रतिष्ठित मानवाधिकार समूहों द्वारा की गई स्वतंत्र जांच में मिस्टर खालिद को आतंकवादी गतिविधि से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं मिला।
इंटरनेशनल कोवेनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (ICCPR) के एक सदस्य देश के तौर पर, भारत को व्यक्तियों के 'उचित समय के भीतर ट्रायल पाने या रिहा होने' और दोषी साबित होने तक निर्दोष माने जाने के अधिकारों को बनाए रखना चाहिए।
Updated on:
02 Jan 2026 03:27 pm
Published on:
02 Jan 2026 07:32 am
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