
अमेरिका के अलबामा में नाइट्रोजन गैस से दिए जाने वाले मृत्युदंड पर रोक लगाई। (फाइल फोटो- IANS)
Nitrogen Gas Death Penalty: अमेरिका के अलबामा राज्य में एक संघीय जज ने बड़ा फैसला करते हुए नाइट्रोजन गैस से मृत्युदंड देने पर रोक लगा दी है। इसको लेकर संघीय जज एमिली सी मार्क्स ने कहा कि यह तरीका संविधान में निहित क्रूर और असामान्य दंड पर प्रतिबंध का उल्लंघन करता है। दरअसल, कैदी जेफरी ली को गुरुवार को नाइट्रोजन गैस से मौत की सजा दी जानी थी। जस्टिस मार्क्स ने कहा कि राज्य के पास मृत्युदंड के दो अन्य तरीके भी हैं- घातक इंजेक्शन और इलेक्ट्रिक चेयर। राज्य चाहे तो ली की पसंद के तरीके, फायरिंग स्क्वॉड का इस्तेमाल कर सकता है। राज्य के अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने कहा है कि फैसले की समीक्षा की जा रही है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है।
अमेरिका का अलबामा राज्य नाइट्रोजन गैस के जरिए मौत की सजा देने वाला दुनिया का पहला राज्य है। जनवरी 2024 में पहली बार इस विवादित तरीके का इस्तेमाल करके हत्या के दोषी केनेथ यूजीन स्मिथ को मृत्युदंड दिया गया था।
इस प्रक्रिया में कैदी के चेहरे पर एक विशेष मास्क लगाया जाता है और उसे शुद्ध नाइट्रोजन गैस दी जाती है। यहां आपको बता दें कि नाइट्रोजन जहरीली गैस नहीं है, लेकिन जब किसी व्यक्ति को शुद्ध और अत्यधिक सांद्रता वाली नाइट्रोजन गैस दी जाती है तो उसके शरीर और दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाती है। इससे आखिरकार कैदी की मृत्यु हो जाती है।
नाइट्रोजन गैस से मौत की सजा की सजा दिए जाने को लेकर विवाद है। इस संबंध में आलोचकों का कहना है कि यह अभी भी एक प्रयोगात्मक प्रक्रिया है। वहीं अमेरिकन कॉलेज ऑफ करेक्शनल फिजिशियंस के अध्यक्ष डॉ. जेफ केलर के अनुसार, इस प्रक्रिया में कई तरह की गड़बड़ियां हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे पीड़ारहित माना जाता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। उनका कहना है कि मास्क पूरी तरह से एयरटाइट नहीं होते और उनमें से हवा अंदर जा सकती है। इससे कैदी को उल्टी हो सकती है या वह गंभीर मस्तिष्क क्षति के साथ वह जीवित भी बच सकता है।
Published on:
11 Jun 2026 02:05 am
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