9 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पश्चिम एशिया संकट से कर्ज के दलदल में फंसा पाकिस्तान, महंगाई और बेरोजगारी ने बढ़ाई मुसीबत

Pakistan Debt Crisis: पाकिस्तान इस समय भारी बाहरी वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 3.5 अरब डॉलर की वापसी की मांग की है...

2 min read
Google source verification

भारत

image

Ashib Khan

Apr 09, 2026

Shehbaz Sharif

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)

Pakistan Economic Crisis 2026: पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर और ज्यादा गहराता दिख रहा है। लिस्बन पोस्ट की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पहले से कर्ज और कमजोर ग्रोथ से जूझ रही पाकिस्तान की इकोनॉमी अब बाहरी झटकों के कारण गंभीर दबाव में आ गई है।

पाकिस्तान पर बढ़ा कर्ज

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। साल 2018 में जहां यह करीब 43 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025 के अंत तक यह बढ़कर 80.52 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके साथ ही देश का बाहरी कर्ज और देनदारियां 138 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं, जिससे विदेशी फंडिंग पर निर्भरता और बढ़ गई है।

वित्तीय दबाव का सामना कर रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय भारी बाहरी वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 3.5 अरब डॉलर की वापसी की मांग की है, जबकि चीन की कंपनी यूनाइटेड एनर्जी पेट्रोलियम ने 220 मिलियन डॉलर के भुगतान के लिए दबाव बनाया है। ऐसे समय में जब पाकिस्तान पुराने कर्ज चुकाने में भी असमर्थ है, उसे नई वित्तीय मदद की तलाश करनी पड़ रही है।

पेट्रोल की बढ़ी कीमतें

इतना ही नहीं पाकिस्तान में ऊर्जा क्षेत्र में भी संकट गहरा गया है। पश्चिम एशिया के हालात के चलते तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। पेट्रोल की कीमत बढ़कर करीब 458 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। एलएनजी की कीमतों में 38% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं बिजली दरों में भी भारी इजाफा हुआ है। इससे महंगाई और तेजी से बढ़ी है और लोगों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है।

पड़ोसी देश में बढ़ी गरीबी

आर्थिक मोर्चे पर स्थिति और खराब होती दिख रही है। 2022 से 2025 के बीच पाकिस्तान की औसत आर्थिक वृद्धि दर केवल 1.7% रही है। इसके चलते रोजगार के अवसर कम हुए हैं और गरीबी बढ़ी है। बेरोजगारी दर 22 से 24 प्रतिशत के बीच बताई जा रही है, जबकि गरीबी का स्तर करीब 29 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन कंपनियों का बाहर जाना पाकिस्तान के खराब बिजनेस माहौल, नीतिगत अस्थिरता और कम होती लाभप्रदता की ओर इशारा करता है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय कई मोर्चों पर गंभीर संकट का सामना कर रही है।