
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (फोटो- ANI)
Imran Khan exile: पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पख्तूनख्वा मिली अवामी पार्टी (PKMAP) के प्रमुख महमूद खान अचकजई ने दावा किया है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान पर एक खास राजनीतिक समझौते को मानने के लिए दबाव डाला जा रहा है। जैसे कभी पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो को देश छोड़ने और निर्वासन में रहने के लिए मजबूर किया गया था। पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अचकजई ने शुक्रवार को पेशावर हाई कोर्ट में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह आरोप लगाया।
पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए अचकजई ने इमरान खान की मौजूदा स्थिति की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के दौर से की। इन दोनों नेताओं को सैन्य और राजनीतिक उथल-पुथल के समय देश से बाहर रहना पड़ा था। 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ द्वारा किए गए तख्तापलट के बाद नवाज शरीफ को सत्ता से हटाकर जेल में डाल दिया गया था। बाद में सऊदी अरब और लेबनान के नेताओं की मध्यस्थता से हुए एक समझौते के तहत उन्हें साल 2000 में विदेश भेज दिया गया।
इसी तरह, 1997 के आम चुनावों में पीपीपी (PPP) की हार और तत्कालीन राष्ट्रपति फारूक लेघारी द्वारा उनकी सरकार को बर्खास्त किए जाने के बाद बेनजीर भुट्टो स्वेच्छा से निर्वासन में चली गई थीं। वहीं, उनके पति आसिफ अली जरदारी भ्रष्टाचार के आरोपों में कई सालों तक जेल में रहे। अचकजई का दावा है कि इमरान खान के साथ भी कुछ ऐसा ही राजनीतिक समझौता करने की कोशिश की जा रही है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इमरान खान ने इस तरह की किसी व्यवस्था के लिए सहमति दी है या नहीं।
अचकजई ने इमरान खान और जेल में बंद अन्य नेताओं से मुलाकात पर लगाई गई पाबंदियों की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं और ऐसा नहीं होता कि राजनीतिक कैदियों को बुनियादी कानूनी सलाह लेने या अपने परिवार के सदस्यों से मिलने से रोका जाए। उन्होंने मांग की कि मौजूदा राजनीतिक गतिरोध को सुलझाने के लिए संसद को वास्तविक अधिकार दिए जाएं और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाए।
अचकजई ने चेतावनी दी कि अगर सरकार अपना तानाशाही रवैया जारी रखती है, तो विपक्षी दल सामूहिक रूप से प्रांतीय और राष्ट्रीय विधानसभाओं से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं।
इमरान खान के मामले के साथ-साथ पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत को लेकर भी राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। 11 अक्टूबर को, पाकिस्तानी सरकार ने इस प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू कर दिया। इस फैसले से प्रांतीय सरकार की शक्तियां सीमित हो गईं, जो इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व में चल रही है।
शुक्रवार को अचकजई के नेतृत्व वाले तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान (TTAP) गठबंधन के नेताओं ने पेशावर हाई कोर्ट में आपातकाल और गवर्नर शासन को चुनौती दी। याचिका में 11 अक्टूबर की घोषणा को रद्द करने की मांग की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि यह फैसला असंवैधानिक है और सरकार के कानूनी अधिकारों के दायरे से बाहर है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत जरूरी शर्तें पूरी नहीं की गई हैं या फिर सरकार ने अपनी शक्तियों की सीमा का उल्लंघन किया है। उन्होंने प्रांतीय विधानसभा की विधायी शक्तियों को संसद को सौंपने, निर्वाचित मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल को हटाने, तथा नए सलाहकार निकायों के गठन जैसे कदमों को भी चुनौती दी है।
Updated on:
17 Oct 2026 12:46 pm
Published on:
17 Oct 2026 12:46 pm
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