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ट्रंप-नेतन्याहू की दोस्ती में दरार! अमेरिका के खिलाफ इजरायली जासूसी का बढ़ा खतरा, पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले

US-Israel Relations: अमेरिका ने इजरायल से जुड़े संभावित जासूसी खतरों को लेकर अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच सब कुछ पहले जैसा नहीं रहा?

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भारत

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Saurabh Mall

Jun 07, 2026

THE PENTAGAN REPORT IRAN-US WAR UPDATE

पेंटागन रिपोर्ट: फोटो में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (इमेज सोर्स: ANI)

Pentagon Intelligence Report: अमेरिका और इजरायल ने साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। लेकिन दोनों देशों के बीच सब कुछ पहले जैसा नहीं रहा? हालिया रिपोर्टों ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने इजरायल से जुड़े जासूसी खतरे के स्तर को बढ़ाकर क्रिटिकल कर दिया है, जो उसकी आंतरिक सुरक्षा रेटिंग का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच रणनीतिक मतभेद बढ़ने की चर्चा है। पिछले दिनों खबर आई थी कि ट्रंप ने फोन कॉल पर नेतन्याहू को फटकार लगाई है। उन्होंने यहां तक कह दिया था मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते, मैं तुम्हें बचा रहा हूं।

वहीं NBC न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, जासूसी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को निगरानी का निशाना बनाया जा सकता है।

दुश्मनों पर फोकस करते हैं इजरायली जासूसी

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने इजरायल से जुड़े संभावित जासूसी खतरों को लेकर अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका पहले से ही इजरायल के आधिकारिक दौरों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाता है, क्योंकि इज़राइली खुफिया एजेंसियों को लंबे समय से जानकारी जुटाने में बेहद सक्रिय माना जाता है। इसी वजह से कई बार अमेरिकी अधिकारी कंप्यूटर, बर्नर फोन और सख्त संचार नियमों का इस्तेमाल करते हैं। होटल के कमरों या दूसरी अपरिचित जगहों पर कॉन्फिडेंशियल मामलों पर बात करने से बचते हैं।

वहीं इजराइल ने अमेरिकी अधिकारियों पर जासूसी करने के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। वाशिंगटन स्थित इज़राइली दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि इज़राइल अमेरिकी सरकार या उसके अधिकारियों के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा नहीं करता। उनका कहना है कि इजराइली खुफिया एजेंसियां अपने दुश्मनों पर ध्यान देती हैं, सहयोगी देशों पर नहीं।

इजराइल का खुफिया तंत्र

इससे पहले साल 2019 में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि व्हाइट हाउस और वॉशिंगटन की कुछ संवेदनशील जगहों के आसपास मिले संदिग्ध मोबाइल निगरानी उपकरणों के पीछे इजराइल का हाथ हो सकता है। यह जानकारी कुछ पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई थी। हालांकि, उस समय ट्रंप प्रशासन ने इज़राइल के खिलाफ कोई सार्वजनिक कार्रवाई या कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, ये छोटे उपकरण स्टिंगरे कहलाते हैं। ये नकली मोबाइल टावर की तरह काम करते हैं और मोबाइल फोन से लोकेशन तथा पहचान संबंधी जानकारी हासिल कर सकते हैं। कुछ मामलों में ये कॉल और डेटा से जुड़ी जानकारी भी जुटाने में सक्षम होते हैं। एक पूर्व अधिकारी का दावा था कि इनका मकसद तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी सहयोगियों की गतिविधियों पर नजर रखना हो सकता था, हालांकि यह कभी स्पष्ट नहीं हुआ कि ऐसी कोई कोशिश सफल हुई थी या नहीं।