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मोदी ने की उस ट्रेन की सवारी, जिसमें से महात्मा गांधी को बाहर फेंक दिया था

7 जून, 1893 का वह दिन जब महात्मा गांधी नस्लीय भेदभाव का शिकार हुए थे। जब गांधी डरबन से प्रीटोरिया जा रहे थे, तब एक श्वेेत ने प्रथम श्रेणी के डिब्बे में उनके चढऩे पर आपत्ति की और उन्हें तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने को कहा गया।

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kamlesh sharma

Jul 09, 2016

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7 जून, 1893 का वह दिन जब महात्मा गांधी नस्लीय भेदभाव का शिकार हुए थे। जब गांधी डरबन से प्रीटोरिया जा रहे थे, तब एक श्वेेत ने प्रथम श्रेणी के डिब्बे में उनके चढऩे पर आपत्ति की और उन्हें तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने को कहा गया।

गांधी ने तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने से इनकार कर दिया तो उन्हें पीटरमेरित्जबर्ग स्टेशन पर ट्रेन से बाहर धकेल दिया गया। वह रातभर भयंकर ठंड में स्टेशन पर रुके रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी पीटरमेरित्जबर्ग स्टेशन पहुंचे तो मानों गांधी की उस यात्रा की यादें तरोताजा हो गई। लेकिन हालात बिलकुल विपरीत थे। मोदी को आदर-सत्कार के साथ ट्रेन में यात्रा करवाई गई।

पीएम मोदी ने भी दक्षिण अफ्रीका में गांधी की ट्रेन यात्रा को याद करने की कोशिश की। अपनी यात्रा के दूसरे दिन मोदी नस्लीय भेदभाव के खिलाफ महात्मा गांधी के संघर्ष को श्रद्धांजलि देने के लिए पेंट्रिक में एक ट्रेन पर सवार होकर पीटरमेरित्जबर्ग गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री ने पेट्रिक रेलवे स्टेशन से पीटरमेरित्जबर्ग तक की यात्रा की। गांधी ने जिस ट्रेन में यात्रा की थी, उसी से मिलती जुलती ट्रेन थी।

भारतीयों को किया संबोधित इससे पहले शुक्रवार को पीएम मोदी प्रिटोरिया पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपति जैकब जुमा के साथ मुलाकात की और व्यापार जगत से धुरंधरों के साथ मीटिंग की थी। मोदी ने गांधी और नेल्सन मंडेला को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। शुक्रवार शाम को मोदी ने जोहान्सबर्ग में 11 हजार से ज्यादा भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की धरती को नेलसन मंडेला और महात्मा गांधी की कर्मभूमि बताया।

उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने ही मोहनदास को महात्मा में बदला था। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए यह यात्रा धरती पर अवतरित होने वाले दो महान आत्माओं महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेल को श्रद्धांजलि देने का एक मौका है। हम नस्लीय दमन और उपनिवेशवाद के खिलाफ अपनी साझे संघर्ष में साथ रहे। यह दक्षिण अफ्रीका ही था, जहां गांधी को सही उद्यम मिला। वह जितना भारत के थे, उतना ही दक्षिण अफ्रीका के।

फिनिक्स सेटलमेंट का भी दौरा करेंगे मोदी फिनिक्स सेटलमेंट का भी दौरा करेंगे। यह जगह भी महात्मा गांधी से जुड़ी है। मोदी यहां से तंजानिया के लिए उड़ान भरने से पहले आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अलुमिनी नेटवर्क की बैठक और डरबन के मेयर व भारतीय उच्चायुक्त की ओर से उनके सम्मान में आयोजित रिसेप्शन में भी हिस्सा लेंगे।