
Saudi Arabia Houthi Attacks
Saudi Arabia Houthi Attacks: सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हूती हमलों के बीच मध्य-पूर्व में सैन्य हलचल तेज होती दिख रही है। किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ता नवाफ ओबैद के मुताबिक रियाद अकेला नहीं है और उसके सहयोगी संभावित जवाब के लिए अपनी क्षमताएं जुटा रहे हैं। उनका दावा है कि तैयारियां जमीन, समुद्र और हवा तीनों मोर्चों पर की जा रही हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ जवाबी कार्रवाई का नहीं, बल्कि यह है कि यह टकराव क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेगा या नहीं।
यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब की संभावित जवाबी रणनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। किंग्स कॉलेज लंदन के वरिष्ठ शोधकर्ता नवाफ ओबैद ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि रियाद और उसके सहयोगी मिलकर एक समन्वित सैन्य प्रतिक्रिया तैयार कर रहे हैं। उनके अनुसार यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से सामने आ सकती है और इसमें कई देशों की सैन्य क्षमताएं शामिल हो सकती हैं।
ओबैद के मुताबिक सऊदी अरब की मदद के लिए हथियार प्रणालियों की तैनाती और लड़ाकू विमानों की गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने तुर्किये को संभावित अहम भागीदार बताया, जबकि मिस्र की सीमित भूमिका की संभावना भी जताई। इसके अलावा सऊदी-यमन सीमा के आसपास अतिरिक्त सैन्य बलों की स्थिति मजबूत किए जाने की बात कही गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हूतियों ने सऊदी शहरों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाने वाले हमले तेज किए हैं। 19 सितंबर को हूतियों ने रियाद में संवेदनशील ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने राजधानी की ओर आ रही एक मिसाइल को रोकने और अन्य हमलों को विफल करने की जानकारी दी।
क्षेत्रीय स्तर पर भी सऊदी अरब को समर्थन के संकेत मिल रहे हैं। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले हूती हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि सदस्य देश सऊदी अरब की सुरक्षा के साथ खड़े हैं।
तुर्किये ने भी हाल में सऊदी अरब की सैन्य जरूरतों में मदद की इच्छा जताई है। रॉयटर्स के अनुसार तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते के तहत सैन्य सहयोग की संभावना की पुष्टि की है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से तत्काल सैन्य कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी चिंता संघर्ष के फैलने को लेकर है। ओबैद का कहना है कि कई देशों को शामिल करने वाला बड़े पैमाने का सैन्य अभियान नियंत्रण से बाहर जा सकता है। यही वजह है कि संभावित कार्रवाई की तैयारी में समय लग रहा है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र और खाड़ी देशों की ओर से नागरिकों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई गई है। सऊदी अरब और यमन के बीच बढ़ता तनाव लाल सागर की सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी अहम बन गया है।
Updated on:
20 Sept 2026 07:00 am
Published on:
20 Sept 2026 06:37 am
