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ड्रोन-बम-मिसाइलें शांत, ईरान-अमेरिका के बीच अब ‘साइलेंट वॉर’

Iran-US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच अब 'साइलेंट वॉर' लड़ा जा रहा है। क्या है यह? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 23, 2026

Donald Trump and Mojtaba Khamenei

डोनाल्ड ट्रंप और मोजतबा खामेनेई (File Photo)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। सीज़फायर की समयसीमा भी खत्म हो चुकी है, लेकिन फिलहाल सैन्य कार्रवाई रुकी हुई है। हालांकि जंग खत्म नहीं हुई है क्योंकि दोनों देशों के बीच एक 'साइलेंट वॉर' (Silent War) जारी है। इस जंग में ड्रोन, बम, मिसाइल का इस्तेमाल नहीं हो रहा बल्कि इकोनॉमी और साइबर स्पेस इसके मुख्य निशाने हैं। अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी की हुई है। साथ ही सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाता जा रहा है। इससे ईरान के सहयोगी देश भी अछूते नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के साथ ही साइबर सेक्टर में जंग शुरू की है।

साइबर हमले कर रहा है ईरान

ईरान ने अमेरिका और इज़रायल (Israel) की प्रणालियों पर साइबर हमले कर संवेदनशील डेटा चुराया है। साथ ही मिनेसोटा राज्य की 30 प्रणालियों पर हमले किए। जुलाई से अब तक 12 अमेरिकी राज्यों में जल आपूर्ति तक की सुविधाओं को निशाना बनाया गया है।

ईरान और अमेरिका कैसे लड़ रहे साइलेंट वॉर?

28 फरवरी को अमेरिका-इज़रायल के ईरान पर हमले के साथ ही ईरान की समाचार वेबसाइटों, प्रार्थना ऐप, टीवी प्रसारण पर साइबर हमले हुए। कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी सामग्री डाली गई। इसके बाद ईरान ने देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया और अमेरिका के साथ ही इज़रायल के खिलाफ भी साइबर हमले शुरू कर दिए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान ने अपनी साइबर क्षमता बढ़ाना बीते डेढ़ दशक में शुरु किया था। 2010 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े औद्योगिक सिस्टम्स को निशाना बनाने वाले साइबर हमले सबसे अहम थे। इसके बाद ईरान से जुड़े समूहों पर भी साइबर हमले करने के आरोप लगे। 2013 से 2017 के बीच 144 अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ और 42 कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टम्स को निशाना बनाया गया।

क्या हो सकती है ईरान की आगे की रणनीति?

साइबर हमलों के ज़रिए कंप्यूटर सिस्टम को हैक करने तक अब साइबर हमले सीमित नहीं रहेंगे। जुलाई में आई एक रिपोर्ट के अनुसार ईरानी साइबर ऑपरेटरों ने मोबाइल नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले पुराने सिग्रलिंग प्रोटोकॉल की कमजोरियों का फायदा उठाकर अमेरिकी सैन्यकर्मियों की लोकेशन पता लगाने का प्रयास किया था। ईरान अलग-अलग तरीकों से अमेरिका के खिलाफ अपने साइबर हमले जारी रखने की कोशिश करेगा।

क्या एआई से बढ़ेगे साइबर हमले?

साइबर वॉरफेयर के एक्सपर्ट्स के अनुसार एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) के कारण अब साइबर हमलों को तेज़ करने की क्षमता बढ़ गई है। इससे हमलों की गति और संख्या के साथ नेटवर्क पर हैकर्स का प्रभाव बढ़ सकता है। इससे विरोधी देश सैन्य क्षमता, सरकारी संस्थानों, कंपनियों और नागरिक सहायता ढांचे पर दबाव बना सकते हैं।