
Strait of Hormuz Crisis Global Meeting (Image - AI)
Strait of Hormuz Crisis Global Meeting: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट को देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने 40 से अधिक देशों को शामिल करते हुए एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की पहल की है जिसका मकसद इस अहम समुद्री मार्ग में सुरक्षित आवाजाही बहाल करना है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस पहल की पुष्टि करते हुए बताया कि यह बैठक पेरिस में आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसमें ऐसे देश शामिल होंगे जो सीधे संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं लेकिन क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में योगदान देना चाहते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। मौजूदा तनाव और नाकेबंदी जैसी स्थिति के कारण यहां से गुजरने वाले जहाजों पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
मैक्रों ने जोर देकर कहा कि इस जलमार्ग को बिना किसी शर्त के जल्द से जल्द खोला जाना चाहिए, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला सामान्य हो सके।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी इस संकट को गंभीर और नुकसानदेह बताया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज में आवाजाही बाधित होने से दुनिया भर में महंगाई और जीवन-यापन की लागत पर असर पड़ रहा है। स्टारमर के मुताबिक, 40 से अधिक देशों को साथ लाकर एक दीर्घकालिक योजना तैयार की जा रही है, जिससे भविष्य में भी इस तरह के संकट से निपटा जा सके।
मैक्रों ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान दोनों के नेताओं से बात की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है, ताकि स्थिति और न बिगड़े। फ्रांस का मानना है कि मौजूदा युद्धविराम को बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसे क्षेत्र के अन्य हिस्सों, जैसे लेबनान, तक भी लागू किया जाना चाहिए।
इस कूटनीतिक पहल का समय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच लंबी बातचीत बेनतीजा रही थी। करीब 21 घंटे चली इस वार्ता के विफल होने के बाद तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे में ब्रिटेन-फ्रांस की यह पहल गतिरोध तोड़ने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।
होर्मुज में जारी संकट का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई में बाधा के कारण कई देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसी वजह से अब दुनिया भर के देश इस संकट के समाधान के लिए एकजुट होते नजर आ रहे हैं।
Published on:
14 Apr 2026 10:55 pm
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