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नई जंग की तेज हुई आहट! चीन से बचने के लिए ताइवान के पास सिर्फ एक रास्ता

चीन दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति बनने की दौड़ में लगा है, वहीं ताइवान अपनी आजादी और लोकतंत्र बचाने की जद्दोजहद में है।

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भारत

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Mukul Kumar

Apr 04, 2026

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ताइवान द्वीप पर नजर रखते हुए चीनी सैनिक। (फोटो- IANS)

एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य ताकत बनने की दौड़ में चीन लगा हुआ है। वहीं, दूसरी तरफ एक छोटा सा द्वीप जो अपनी आजादी और लोकतंत्र बचाने की जद्दोजहद में जुटा है।

ताइवान के सामने आज यही सबसे बड़ा सवाल है कि बीजिंग के बढ़ते खतरे से वह कैसे बचे। अमेरिका की एक मशहूर पत्रिका में छपी रिपोर्ट ने इसका जवाब दिया है और वह जवाब है 'सेल्फ डिटरेंस' यानी खुद इतना मजबूत बनो कि दुश्मन हमला करने से पहले सौ बार सोचे।

चीन हर रोज डराता है ताइवान को

जो लोग सोचते हैं कि चीन का खतरा सिर्फ बयानबाजी तक है तो वे गलत हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी लड़ाकू विमान अब रोज ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा पार कर रहे हैं।

यह वही लकीर है जो दोनों पक्षों के बीच एक अनकहा समझौता था। इसके अलावा ताइवान की सरकारी वेबसाइटों और सिस्टम पर साइबर हमले होते हैं। सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाई जाती हैं ताकि ताइवान के लोगों का अपनी सरकार और संस्थाओं पर से भरोसा उठ जाए।

चीन की चाल समझिए

बीजिंग की रणनीति बहुत चालाक है। वह सीधे हमला नहीं करता बल्कि धीरे धीरे ऐसा माहौल बनाता है कि ताइवान के लोग खुद हिम्मत हार जाएं।

चीन बार बार यह कहता है कि ताइवान उसका घरेलू मामला है। इससे वह दुनिया के बाकी देशों को यह संदेश देता है कि इसमें दखल मत दो। रिपोर्ट कहती है कि इस माहौल में ताइवान सिर्फ दूसरों की सहानुभूति के भरोसे नहीं रह सकता।

लोकतंत्र होना काफी नहीं, ताकत भी चाहिए

रिपोर्ट में एक बहुत जरूरी बात कही गई है जो सोचने पर मजबूर करती है। इतिहास गवाह है कि सिर्फ लोकतंत्र होने से कोई देश सुरक्षित नहीं हो जाता।

अगर आपके पास अपनी रक्षा करने की ताकत नहीं है तो बड़ी से बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था भी दुश्मन के सामने झुक जाती है। इसीलिए ताइवान को अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी।

पहाड़, शहर और समुद्र, ताइवान की भौगोलिक ताकत को समझिए

ताइवान की जमीन खुद उसके लिए एक हथियार है। पहाड़ी इलाका, घने शहर और संकरे समुद्री रास्ते किसी भी हमलावर के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।

रिपोर्ट कहती है कि अगर ताइवान छोटी और तेज मिसाइल प्रणालियां, मजबूत बुनियादी ढांचा और बिखरी हुई कमान व्यवस्था तैयार कर ले तो चीन के लिए हमला करना बहुत महंगा सौदा बन जाएगा।

चीन से सीधी टक्कर नहीं

रिपोर्ट में कहा गया है कि ताइवान का मकसद चीन को हराना नहीं है क्योंकि ताकत में वह उससे बहुत छोटा है। लेकिन वह ऐसी स्थिति जरूर बना सकता है कि अगर चीन हमला करे तो उसे इतना नुकसान उठाना पड़े कि वह पहले ही सोचे कि क्या यह जोखिम उठाना सही है। आम लोगों को भी नागरिक सुरक्षा की ट्रेनिंग देने की बात कही गई है ताकि जरूरत पड़ने पर हर नागरिक अपने देश की रक्षा में खड़ा हो सके।

ताइवान की लड़ाई सिर्फ उसकी नहीं

रिपोर्ट एक बड़ी बात कहकर खत्म होती है। ताइवान का संघर्ष सिर्फ एक द्वीप की लड़ाई नहीं है। यह उन सभी लोगों की लड़ाई है जो आजादी और अपनी मर्जी से जीने का हक चाहते हैं।

अगर ताइवान टिका रहा तो यह दुनिया को यह संदेश देगा कि लोकतंत्र सिर्फ एक विचार नहीं बल्कि एक ऐसी व्यवस्था है जिसे बचाया जा सकता है।