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ट्रंप ने क्यों दिया ‘खार्ग द्वीप’ को कब्जा करने का ऑर्डर? हजारों US सैनिक रवाना हुए, ईरान ने भी बिछाया भयंकर जाल

अमेरिका-ईरान तनाव विकराल रूप ले चुका है। हजारों अमेरिकी जमीनी सैनिक (82nd Airborne सहित) मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं।

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भारत

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Mukul Kumar

Mar 28, 2026

Iran-Israel War

ईरान-इजराइल-अमेरका युद्ध में बड़ा अपडेट। (फोटो- AI)

अमेरिका और ईरान के बीच जो तनाव बढ़ रहा है, अब वो विकराल रूप ले चुका है। ताजा खबरें आ रही हैं कि हजारों अमेरिकी जमीनी सैनिक मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना हो रहे हैं। और निशाने पर है ईरान का खार्ग द्वीप, जो फारस की खाड़ी में है और जहां से ईरान का 90 फीसदी तेल निर्यात होता है। इसको ईरान की आर्थिक रीढ़ भी कह सकते हैं। अगर अमेरिका ने इस पर कब्जा कर लिया तो ईरान की आर्थिक रीढ़ टूट जाएगी।

होर्मुज की वो सात चाबियां जो ईरान के पास हैं

दरअसल, फारस की खाड़ी में ईरान के दर्जनों द्वीप हैं, लेकिन उनमें सात खास हैं। जिनकी वजह से ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह काबिज है। उन सातों का नाम- अबू मूसा, ग्रेटर तुंब, लेसर तुंब, हेंगाम, केश्म, लारक और होर्मुज है।

चीन की सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इन्हें ईरान की 'मेहराबदार रक्षा पंक्ति' कहा है। सीधे शब्दों में कहें तो ये सातों द्वीप मिलकर एक ऐसा घेरा बनाते हैं जिसके बिना होर्मुज से कोई जहाज आसानी से नहीं गुजर सकता।

छोटे द्वीप पर बड़ा खतरा

अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब, ये तीन द्वीप सबसे पश्चिमी छोर पर हैं। यहीं से होर्मुज का असली खेल शुरू होता है। खाड़ी का पानी वैसे भी ज्यादा गहरा नहीं है, तो बड़े जंगी जहाज और तेल टैंकर इन्हीं द्वीपों के करीब से गुजरने पर मजबूर होते हैं। और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के तेज हमलावर नाव, ड्रोन और बारूदी सुरंगें यहीं से काम करती हैं।

पिछले साल आईआरजीसी के नौसेना कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तांगसीरी ने साफ कहा था कि इन द्वीपों को पूरी तरह हथियारबंद किया जाएगा और दुश्मन के जहाजों पर हमला करने की पूरी क्षमता है। हालांकि अब तांगसीरी इस दुनिया में नहीं हैं, इजराइल के एक ऑपरेशन में वो मारे जा चुके हैं।

लारक की दीवार

उधर, सीएनएन के सैन्य विश्लेषक सेड्रिक लेटन ने एक अहम बात बताई। होर्मुज के पूर्वी मुहाने पर बैठा लारक द्वीप उन जहाजों के लिए सबसे बड़ी रुकावट है जो खाड़ी में दाखिल होना चाहते हैं। वहां से मिसाइल या छोटी हमलावर नावें किसी भी जहाज को रोक सकती हैं। मतलब साफ है, पहले लारक को काबू करो, तभी आगे बढ़ो।

दो हफ्ते की लड़ाई, फिर बड़ा फैसला

विश्लेषक और पूर्व अमेरिकी पैसिफिक कमांड के खुफिया निदेशक कार्ल शूस्टर कहते हैं कि इन सातों द्वीपों पर कब्जे में दो दिन से दो हफ्ते तक लग सकते हैं। लेकिन अगर एक बार ये हो गया तो नतीजा बड़ा होगा।

अबू मूसा जैसे द्वीप पर रडार और सैनिक तैनात करो, फिर होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज पर नजर रखी जा सकती है और ईरान के ड्रोन अड्डों को खत्म किया जा सकता है।

इसके लिए अमेरिका दो मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट यानी करीब 4,000 सैनिक भेज रहा है। साथ ही 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के एक हजार जवानों को भी तैयार रहने को कहा गया है।

बातचीत भी, बमबारी भी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की समयसीमा 10 दिन बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी गई है ताकि बातचीत का मौका मिल सके। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी माना कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है।

लेकिन रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ का रुख अलग है। उन्होंने साफ कह दिया कि अमेरिका बम गिराते हुए भी बातचीत करेगा। हालांकि, फिलहाल किसी भी द्वीप पर हमले की कोई तारीख तय नहीं हुई है।

लेकिन जिस तरह से सैनिक आगे बढ़ रहे हैं और जिस तरह से होर्मुज की घड़ी टिकटिक कर रही है, ये तनाव किस मोड़ पर जाएगा, इसका जवाब शायद अगले कुछ दिनों में मिल जाए।