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अमेरिका ने भारत को दिया झटका, इस मामले में अधिकारियों के वीजा किए रद्द

अमेरिका ने भारत के अधिकारियों के वीजा रद्द कर दिए और उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों पर अमेरिका में फेंटेनाइल प्रीकर्सर की तस्करी में संलिप्तता के भी आरोप लगाए है।

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भारत

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Ashib Khan

Sep 18, 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-IANS)

टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने भारत पर एक और बड़ा एक्शन लिया है। अमेरिका ने गुरुवार को कहा कि उसने भारत के अधिकारियों के वीजा रद्द कर दिए हैं और उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों पर अमेरिका में फेंटेनाइल प्रीकर्सर की तस्करी में संलिप्तता के भी आरोप लगाए है। अमेरिकी दूतावास ने बयान जारी कर रहा कि व्यापारिक अधिकारियों और कॉर्पोरेट नेताओं के वीजा को रद्द करने और बाद में वीजा देने से इनकार करने का फैसला अमेरिकियों को खतरनाक सिंथेटिक नशीले पदार्थों से सुरक्षित रखने के ट्रंप प्रशासन के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया।

भारत ने नहीं दी प्रतिक्रिया

हालांकि अभी इस मामले में भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बता दें कि यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा प्रतिबंधों की घोषणा की है। इससे पहले अमेरिका ने मई में भी वीजा पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था। इस दौरान ट्रैवल एजेंसियों के मालिकों और अधिकारियों पर जानबूझकर अमेरिका में अवैध यात्रा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। 

नाम नहीं किए जारी

अमेरिकी दूतावास ने गुरुवार को कहा कि वह फेंटेनल प्रीकर्सर की तस्करी करने वाली कंपनियों से जुड़े अधिकारियों को अमेरिकी वीज़ा के लिए आवेदन करते समय कड़ी जांच के लिए चिह्नित कर रहा है। वहीं अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका इन कंपनियों और व्यक्तियों के नाम जारी करने में असमर्थ है।

इन कंपनियों पर लगाया था आरोप

बता दें कि जनवरी में अमेरिका ने दो भारत आधारित कंपनियों पर अमेरिका में फेंटानिल प्रीकर्सर रसायनों को बांटने करने और आयात करने के आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया था। अमेरिका न्याय विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि भावेश लाठिया को 4 जनवरी को न्यूयॉर्क शहर में गिरफ्तार किया गया था और इन आरोपों में न्यूयॉर्क के पूर्वी ज़िले के मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था।

कंपनियों ने अपनाए थे धोखाधड़ी वाले तरीके

अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय डाक और पैकेज वाहकों के ज़रिए अमेरिका और मेक्सिको में रासायनिक उत्पाद भेजे। सीमाओं पर रासायनिक उत्पादों का पता लगने से बचाने के लिए कंपनियों ने कथित तौर पर भ्रामक और धोखाधड़ी वाले तरीके अपनाए थे।