
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता जहाज (Representative Image- IANS)
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर दबाव और तेज कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि समुद्र में तेल ले जा रहे जहाजों को रास्ते से ही वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर सीधा असर डालने वाला कदम है।
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी के दौरान अब तक 31 जहाजों को या तो रास्ते से वापस भेज दिया गया है या उन्हें अपने बंदरगाह लौटने के लिए कहा गया है। इनमें ज्यादातर जहाज तेल टैंकर बताए जा रहे हैं।
इसका मतलब साफ है कि दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर इसका असर पड़ सकता है। क्योंकि ईरान क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
यूएस सेंट्रल कमांड (अमेरिकी सेना) ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि ज्यादातर जहाजों ने अमेरिकी निर्देशों का पालन किया है। यानी बिना टकराव के ही कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या यह समुद्री नियमों के तहत सही है या नहीं।
अमेरिका ने इस नाकाबंदी को हल्के में नहीं लिया है। इस पूरे ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 17 युद्धपोत और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान भी इस मिशन में शामिल हैं। यह दिखाता है कि अमेरिका इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस कार्रवाई का मकसद साफ तौर पर ईरान पर दबाव बनाना है। पहले से ही दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और ऐसे में यह नाकाबंदी हालात को और ज्यादा गंभीर बना सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर सिर्फ ईरान या अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
तेल टैंकरों को रोकने या वापस भेजने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और कई देशों के लिए ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।
खासतौर पर एशियाई और यूरोपीय देशों के लिए यह चिंता की बात है, जो इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करते हैं।
Published on:
23 Apr 2026 07:32 am
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