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कौन थे लोबगा रंगजेन? संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर किया आत्मदाह, चीन के खिलाफ कर रहा था प्रदर्शन

Tibetan activist Lobga Rangzen: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर चीन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आत्मदाह करने वाले तिब्बती प्रदर्शनकारी लोबगा रंगजेन और घटना के बारे में जानें।
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Tibetan protester Lobga Rangzen.

लोबगा रंगजेन 'फ्री तिब्बत' अभियान से जुड़ा हुआ था। (Photo- X/@AdityaRajKaul)

Lobga Rangzen Lobga Sets Himself On Fire: लोबगा रंगजेन ने गुरुवार शाम न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह कर लिया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। मृतक की पहचान उसके एक मित्र ने लोबगा रांगजेन के रूप में की है। बताया गया कि वह पिछले करीब दो दशकों से अमेरिका में रह रहा था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क शहर में ईस्ट 43वीं स्ट्रीट और फर्स्ट एवेन्यू के पास स्थानीय समयानुसार गुरुवार शाम करीब 7 बजे रंगजेन ने खुद को आग लगा ली। घटनास्थल से गुजर रहे वाहन चालक हॉर्न बजाते रहे। कुछ ही क्षण बाद वह जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स ने आग बुझाई। इसके बाद उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

चीन के खिलाफ कर रहा था विरोध प्रदर्शन

लोबगा रंगजेन तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन और वर्तमान 'फ्री तिब्बत' अभियान से जुड़ा हुआ था। यह आंदोलन तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की संप्रभुता की बहाली के साथ ही साथ-साथ तिब्बती बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को अधिकार सौंपने की मांग करता है। यह राजनीतिक आंदोलन तिब्बत के चीन में विलय का विरोध करता है। यह विलय मई 1951 में हुए सत्रह सूत्रीय समझौते के बाद हुआ था।

मार्च 2009 से अब तक 150+ ने किया आत्मदाह

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की संप्रभुता की बहाली की मांग को लेकर मार्च 2009 से अब तक तिब्बत में 150 से अधिक लोगों ने कथित तौर पर चीनी कब्जे के विरोध में आत्मदाह किया है। 'फ्री तिब्बत' अभियान की वेबसाइट के मुताबिक, आत्मदाह के दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने दलाई लामा की लंबी आयु और उनकी तिब्बत वापसी समेत कई मांगो वाले नारे लगाए हैं।

1990 के दशक में यह आंदोलन अमेरिका में 'तिब्बतन फ्रीडम कॉन्सर्ट्स' के जरिए वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा में आया। इन आयोजनों में U2, रेड हॉट चिली पेपर्स और रेज अगेंस्ट द मशीन जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगीत बैंडों ने प्रस्तुति दी थी।

क्या है पूरा विवाद?

चीन और तिब्बत विवाद की शुरुआत 1950 में हुई। उस चीनी सेना ने तिब्बत में दाखिल होकर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। चीन का दावा है कि तिब्बत सदियों से उसका अभिन्न हिस्सा रहा है। तिब्बती निर्वासित नेतृत्व का कहना है कि तिब्बत पहले स्वतंत्र या अत्यधिक स्वायत्त क्षेत्र था।

1959 में विद्रोह के बाद दलाई लामा भारत आ गए और धर्मशाला से निर्वासित प्रशासन चलाने लगे। चीन पर तिब्बत में धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवाधिकारों के दमन के आरोप लगते रहे हैं, जिन्हें वह खारिज करता है। अधिकांश देश तिब्बत को चीन का हिस्सा मानते हैं, लेकिन मानवाधिकारों को लेकर चिंता भी जताते हैं।