
सिंध के नेता शफी बुरफत। (फोटो: ANI.)
Human Rights Violations in Pakistan: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान, सिंधी राष्ट्रवादी संगठन जेय सिंध मुत्तहिदा महाज (JSMM) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने एक खुला पत्र (JSMM UN Appeal) जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन (Human Rights in Pakistan) और जातीय शोषण की ओर खींचा। बुरफत ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सत्ता और नीतियों का आधार धार्मिक कट्टरता है, जिसे हथियार बना कर सिंधी, बलूच, पश्तून, सराइकी और ब्राहुई (Ethnic Minorities Oppression) जैसे ऐतिहासिक समुदायों को हाशिए पर डाला गया है। उनका कहना है कि इन समुदायों को दशकों से राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से दबाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सत्ता मशीनरी, जिसमें सेना, खुफिया एजेंसियां और राजनयिक तंत्र शामिल हैं — पर जातीय पंजाबियों का वर्चस्व है। इस असंतुलन के चलते अन्य समुदायों को “आधुनिक गुलामी” का सामना करना पड़ रहा है।
बुरफत ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जबरन गायब कर रही है, उन्हें प्रताड़ित कर रही है और राज्य प्रायोजित हिंसा का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को आतंकवादी करार देकर उनकी आवाज को दबा देती है।
बुरफत ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान में स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को योजनाबद्ध ढंग से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक प्रकार की सांस्कृतिक सफाई है, जिसका लक्ष्य इन समुदायों की पहचान मिटाना है।
उन्होंने पाकिस्तान सरकार पर धार्मिक उग्रवाद और क्षेत्रीय आतंकवाद को समर्थन देने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति करना और विरोधी आवाजों को कुचलना है।
पाकिस्तान के ऐतिहासिक समुदायों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाए।
स्वतंत्रता आंदोलनों को आतंकवाद से जोड़कर न देखा जाए।
बुरफत ने यह भी मांग की कि जो लोग इन अत्याचारों के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाए।
पाकिस्तान को उन मंचों पर बोलने की अनुमति नहीं दें।
बुरफत ने स्पष्ट कहा कि जब तक पाकिस्तान अपने देश में हो रहे अत्याचारों के लिए जवाबदेह नहीं बनता, तब तक उसे संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
बहरहाल बुरफत की यह अपील न सिर्फ पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सक्रिय हस्तक्षेप की मांग भी करती है। अब यह देखना बाकी है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक नेता इस ओर कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।
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Published on:
22 Sept 2025 08:41 pm
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