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AK-47 और रॉकेट लॉन्चर लेकर पहाड़ों से उतरा बनी हशीश कबीला, हूतियों के सपोर्ट में बढ़ी सऊदी अरब की टेंशन

Houthi Rebels: यमन में हूतियों के समर्थन में उतरा बनी हशीश कबीला। AK-47 और रॉकेट लॉन्चर लेकर मरीब की ओर बढ़ते लड़ाकों ने बढ़ाई सऊदी अरब की टेंशन। पढ़ें पूरी खबर...
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भारत

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Pratiksha Gupta

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Updated: 14 Sep 2026, 9:04 AM IST

Yemen Houthi Rebels AI Weapons

यमन में मिसाइल प्रोग्राम के लिए AI का इस्तेमाल। फोटो में हूती विद्रोही (सोर्स-आईएएनएस)

Houthi Rebels: यमन में हूती विद्रोहियों के समर्थन में बनी हशीश कबीले की हथियारबंद लामबंदी ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। आधुनिक सैन्य वर्दी के बजाय पारंपरिक लिबास 'जाम्बिया', पैरों में आम चप्पलें और हाथों में लटके AK-47 व रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG)… यमन का शक्तिशाली बनी हशीश कबीला एक बार फिर जंग के मैदान में उतर चुका है। यमन का ताकतवर बनी हशीश कबीला राजधानी सना के पूर्वी पहाड़ों से निकलकर अब मरीब शहर की ओर बढ़ रहा है। हूती विद्रोहियों का साथ दे रहे इस कबीले की लामबंदी ने सऊदी अरब और उसके सहयोगी गुटों की चिंता बढ़ा दी है।

कभी हूतियों का विरोधी था बनी हशीश, अब बना सबसे मजबूत ढाल

इतिहास देखें तो बनी हशीश कबीला हमेशा से हूतियों का दोस्त नहीं था। वर्ष 2008-09 के दौरान इस कबीले और हूती आंदोलन के बीच हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। हालांकि, 2014 में जब हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर अपना वर्चस्व स्थापित किया, तब इस क्षेत्र के राजनीतिक और सैन्य समीकरण पूरी तरह बदल गए। सना के बिल्कुल करीब और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पहाड़ी इलाकों पर काबिज होने के कारण हूतियों ने बनी हशीश कबीले को अपने प्रभाव क्षेत्र में ले लिया। आज यह कबीला हूती नेटवर्क के लिए जनबल और स्थानीय लड़ाकों की आपूर्ति का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।

तेल और गैस का खजाना है मरीब शहर

बनी हशीश के लड़ाकों का रुख जिस मरीब शहर की तरफ है, वह यमन की राजनीति और अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ माना जाता है।दरअसल, मरीब में यमन के सबसे बड़े व्यावसायिक तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार मौजूद हैं और देश का मुख्य पावर प्लांट भी इसी इलाके में स्थित है। भौगोलिक दृष्टिकोण से यह शहर राजधानी सना को पूर्वी यमन के विस्तृत रेगिस्तानी क्षेत्रों से जोड़ने वाले एक सामरिक पुल की तरह काम करता है। इसके अलावा, मरीब लंबे समय से हूती विरोधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार और स्थानीय विरोधी कबीलों का सबसे मजबूत गढ़ रहा है। ऐसे में यदि हूती लड़ाके बनी हशीश कबीले की मदद से मरीब पर कब्जा जमा लेते हैं, तो इससे न सिर्फ उन्हें विशाल ऊर्जा संसाधनों का अधिकार मिल जाएगा, बल्कि सना के पूरे पूर्वी हिस्से पर उनकी पकड़ पूरी तरह मजबूत हो जाएगी।

सऊदी अरब के लिए क्यों पैदा हुई नई सिरदर्दी?

मरीब में बन रहे नए हालात का सीधा असर सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ रहा है, क्योंकि मरीब शहर सऊदी सीमा और सना के बीच एक रास्ते की तरह काम करता है। अगर यह इलाका पूरी तरह हूतियों के नियंत्रण में चला जाता है, तो उनके पास सऊदी सीमाओं के नजदीक ड्रोन और मिसाइलें तैनात करने के लिए ज्यादा सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध हो जाएंगे। इसके साथ ही, तेल और गैस संसाधनों पर कब्जे से हूती आंदोलन को भारी आर्थिक मजबूती मिलेगी, जिससे वे लंबे समय तक जंग जारी रखने में सक्षम होंगे। यह स्थिति सऊदी समर्थित यमनी बलों के सबसे बड़े प्रशासनिक और सैन्य इलाके को खत्म कर देगी। मिसाइलों और हाई-टेक ड्रोन के इस दौर में यमन की जमीन पर कबीलाई लड़ाकों की यह वापसी यह साबित करती है कि मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष में आज भी सदियों पुरानी कबीलाई वफादारियां कितनी असरदार हैं।