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जुगाड़ के इस पटाखे को खरीदने वाले सावधान! आंखों की रोशनी तक जा रही, बिक्री पर बैन

Diwali Firecrackers : जुगाड़ की पटाखा बंदूक से बच्चों की आंखे प्रभावित हो रही हैं। कुछ की रोशनी जाने तक की जानकारी सामने आई है। कार्बाइड और आग का संपर्क होता है बेहद घातक। नेत्र रोग विशेषज्ञ के पत्र के बाद एडीएम ने जिलेभर में इस पटाखे पर प्रतिबंध लगाया।

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Diwali Firecrackers

जुगाड़ के इस पटाखे पर प्रतिबंध (Photo Source- Patrika)

Diwali Firecrackers :मध्य प्रदेश में इन दिनों प्लास्टिक पाइप से बन रही जुगाड़ की पटाखा बंदूक काफी ट्रेंड में है। लेकिन, इसमें इस्तेमाल हो रहे कैल्शियम कार्बाइड के कारण कई बच्चों की आंखें प्रभावित हो रही हैं। यहां तक कि, सूबे के आगर मालवा में दो बच्चों की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जाने की जानकारी तक सामने आई है। इसी जिले में जुगाड़ की बंदूक के दुष्प्रभाव सामने आने के बाद जिले के नेत्र रोग विशेषज्ञ ने इसके नुकसान बताता एक पत्र प्रशासन को लिखा, जिसपर एडीएम ने इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।

देसी पटाखा बंदूक के कारण आखों की समस्या को लेकर रोज बच्चे चिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक सक्सेना ने बताया, इस बंदूक में कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके संपर्क में आने से आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। हालात ये हैं कि, सिर्फ 5-6 दिन में ही 10-12 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ बच्चे स्थायी रूप से रोशनी खोने की भी खबर है। घटनाओं को लेकर डॉ. सक्सेना ने चिंता जताते हुए कोतवाली पुलिस को लिखित सूचना दी है। सूचना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शहर में बिक रही इस प्रकार की देसी बंदूकें जब्त कर ली हैं।

सस्ती और चलाने में आसान, इसलिए तेजी से बढ़ी मांग

दीपावली को लेकर इस साल बाजार में जुगाड़ की देसी पटाखा बंदूक आई है। ये पीवीसी पाइप के टुकड़ों से बनती है, जिसमें गैस बनाकर पटाखे की आवाज करने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल होता है। कम कीमत और उपयोग में आसान होने के चलते बच्चों के साथ साथ युवा भी इसे खासा पसंद कर रहे हैं। ये सिर्फ आंखों के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानी सेहत के लिए ही नुकसान दायक है। जानकारी के अभाव में बच्चे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और बाद में जब हाथ या अन्य माध्यम से यह आंख के संपर्क में आने पर खतरनाक साबित हो रहा है।

दो बच्चे इंदौर रैफर

डॉ. सक्सेना ने बताया कि, रविवार को भी दो जख्मी बच्चे इस पटाखे के इस्तेमाल से हुए दुष्परिणाम को लेकर आए थे। उनका कार्निया बहुत डेमेज हो गया था। उन्हें तुरंत इंदौर रैफर किया है।

ऑक्सीएसिटिलीन गैस होती है खतरनाक

बकौल डॉ. सक्सेना कार्बाइट से ऑक्सीएसिटिलीन गैस निकलती है, जो लाइटर की चिंगारी के संपर्क में आने से नुकसान करती है। उनके अनुसार, पीड़ित को डॉक्टर को तुरंत दिखाएं, अपने स्तर पर कोई इलाज न करें।

अवैध रूप से बनाए गए 'देसी पटाखों' पर प्रतिबंध

एडीएम आरपी वर्मा ने जनसुरक्षा दृष्टिगत और कानूनन प्रतिबंधित होने के मद्देनजर, जिले में प्लास्टिक पाइप, कैल्शियम कार्बाइड, एसिटिलीन गैस या अन्य विस्फोटक रसायनों का उपयोग कर ‘देसी पटाखे’ (प्लास्टिक पाइप से बनाई गन इत्यादि) तैयार करने, रखने, बेचने, परिवहन करने अथवा उपयोग करने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक अधिनियम, तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

नियुक्त अधिकारी करेंगे निरीक्षण

अपर कलेक्टर ने समस्त एसडीएम, एसडीओपी, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और थाना प्रभारी को आदेशित किया है कि पटाखा दुकानों, फुटकर और खेरची विक्रेताओं के यहां निरीक्षण करेंगे और प्रतिबंधित पटाखे पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।