
तालचिड़ा बस स्टैण्ड पर जल निकास की व्यवस्था नहीं होने से स्टेट हाइवे पर भरा पानी
गुढ़ाचन्द्रजी. जिला सीमा पर बसे तालचिड़ा के विकास में घाटी बाधक बनी हुई है। जिससे क्षेत्र आज भी विकास में पिछड़ा हुआ है। तालचिड़ा घाटी जिले सहित तहसील व गांव के विकास में रोड़ा बनकर खड़ी है।
सरकार ने सिकन्दरा से गंगापुरसिटी सड़क निर्माण व चौड़ाईकरण के लिए करोड़ों रुपए की सड़क तो स्वीकृत कर दी। लेकिन घाटी की ऊंचाई व चौड़ीकरण के लिए प्रयास नहीं किए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि घाटी को काटा जाता तो कोटा, बारा, बूंदी व झालावाड़, सवाईमाधोपुर जिले सहित दिल्ली, आगारा व मध्यप्रदेश सीधे जुड़ सकते थे। लोगों का आवागमन भी सुगम हो जाता। तालचिड़ा गांव पहाड़ी की तलहटी व जिला सीमा के अंतिम छोर पर बसा गांव है।
पेयजल समस्या
से जूझ रहे लोग
गांव में पेयजल, बिजली, चिकित्सा, सड़क आदि से सम्बन्धित कई समस्याएं हैं। जल स्तर नीचे चले जाने से आज यह गांव पेयजल समस्या का दंश झेल रहा है।
किसानों के अधिकांश नलकूप सूख चुके है। ऐसे में नदी-नालों में एनिकट बने तो जलस्तर में सुधार हो सके। उपस्वस्थ्य केन्द्र में भी स्टाफ का टोटा है। इसके चलते लोगों को १० किमी दूर गुढाचन्द्रजी जाना पड़ता है।
गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है, लेकिन जंगली ***** किसानों की फसल को बर्बाद कर देते है। अलग से बालिका स्कूल भी नहीं है। तालचिड़ा ग्राम पंचायत में तालचिडा सहित मीणा पट्टी, चैनपुरा, रामधनकापुरा, रामपुरा, मौहचीकापुरा आदि गांव सम्मलित है।
यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती व पशु पालन है। कई जगह पानी के निकास की समुचित व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर जलभराव रहता है। जिससे गंदगी फैली रहती है। जिससे लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि तालचिड़ा विकास की धारा से नहीं जुड़
पा रहा है।
पशु उपस्वास्थ्य केन्द्र के लिए नहीं भवन
ग्रामीण रामस्वरुप मीणा, महेन्द्र सिंह, बलवीर मीणा ने बताया कि यहां पर पशु उपस्वास्थ्य केन्द्र करीब ६ माह पूर्व स्वीकृत हुआ था। लेकिन खुद का भवन नहीं होने से यह ग्राम पंचायत भवन में ही संचालित है। यहां लगा कम्पाउण्डर कभी-कभी ही आता है। इससे पशुओं के टीके भी नहीं लग पा रहे हैं। लोगों को पशुओं के इलाज के लिए दस किमी दूर गुढाचन्द्रजी जाना पड़ता है।
Published on:
15 Oct 2018 12:02 pm
