
Hema Malini
डॉ. भानु प्रताप सिंह
मथुरा। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री और मथुरा से भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya janata party) की सांसद हेमा मालिनी (Hema malini) लोकसभा (Lok sabha) में मथुरा (Mathura) के मुद्दों को लेकर मुखर हैं। उन्होंने संसद में सबसे पहले मथुरा-वृंदावन (vrindavan) के उत्पाती बंदरों (Monkey) की समस्या उठाई। मंकी सफारी बनाने की बात कही। फिर मथुरा जिले समेत पूरे उत्तर प्रदेश में शैक्षिक (Education) दुरावस्था का मामला उठाया। अब उन्होंने करोड़ों भक्तों की आस्था के प्रतीक गोवर्धन (Goverdhan) के विकास का मुद्दा उठाया है। वे चाहती हैं कि गोवर्धन में श्री गोवर्धन जी श्राइन बोर्ड का गठन हो, ताकि तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati balaji Temple), वैष्णो देवी (Vaishno devi) और स्वर्ण मंदिर (Golden temple) जैसी सुव्यवस्थाएं हो सकें।
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बहुत कम आती हैं मथुरा
हेमा मालिनी मथुरा की दूसरी बार सांसद चुनी गई हैं। उन्होंने अंतिम चुनाव मानकर वोट मांगे थे। जनता ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया। वे मथुरा में कम ही दिखती हैं। पहले कार्यकाल में महीने में दो-तीन बार शनिवार और रविवार को आया करती थीं। दूसरे कार्यकाल में उन्होंने रविवार को भी आना बंद कर दिया है। मथुरा के आम नागरिक ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी परेशान हैं। यह बात अलग है कि आम नागरिक खुलकर बोल देता है और भाजपा कार्यकर्ता मन की बात मन में ही रखते हैं। अनुशासन के चलते खुलकर नहीं बोल सकते हैं, लेकिन मन में कसक तो है ही। कसक इस बात की है कि चुनाव में प्रचार में हेमा मालिनी के लिए दिन-रात एक कर दिया और अब वही समस्या सुनने के लिए उपलब्ध नहीं हैं। हेमा मालिनी मथुरा में तभी आती हैं जब उन्हें उद्घाटन करना हो। वैसे यह समस्या हर उस लोकसभा क्षेत्र की है, जहां से वीवीआईपी (VVIP) सांसद चुने जाते हैं।
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बंदरों की समस्या
फिर भी, हेमा मालिनी मथुरा के मुद्दों को लेकर लोकसभा में बोल रही हैं तो पूरे देश का ध्यान जा रहा है। मथुरा-वृंदावन में बंदरों की विकराल समस्या है। हाल यह है कि मंदिरों में दर्शन करने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के चेहरे से बंदर चश्मा उतार ले जाते हैं। फिर फ्रूटी लेने के बाद ही चश्मा वापस करते हैं। अकसर चश्मा तोड़ देते हैं। जेब से मोबाइल निकाल ले जाते हैं। वृंदावन में स्थान-स्थान पर बंदरों से सावधान रहने के बोर्ड लगे हुए हैं। भूख से व्याकुल बंदर हमलावर भी हो गए हैं। व्यक्ति को अकेला देखकर झपट्टा मार देते हैं। समस्या वहीं की वहीं है। प्रशासन फिलहाल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है।
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शिक्षा की समस्या
इसमें कोई शक नहीं है कि मथुरा समेत पूरे उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। मध्याह्न भोजन के नाम पर तो घोटाला ही हो रहा है। आए दिन खबरें मिलती रहती हैं कि किस तरह से एक किलो दूध 60 बच्चों को पिलाया जा रहा है। मिड डे मील के नाम पर नमक से रोटी खिलाने की तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं। स्कूलों में छात्र और शिक्षक अनुपात का कोई मतलब नहीं है। कहीं शिक्षकों की भरमार है तो कहीं छात्रों की। अधिकांश शिक्षक किसी न किसी राजनीतिक दल से हैं, इसलिए जुगाड़ लगाकर अपने घर के पास ही तैनाती करा लेते हैं, फिर भी स्कूल नहीं जाते हैं। इसी कारण हेमा मालिनी ने शिक्षा को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की बात कही है। मतलब सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर चलाएं। अभी देखना बाकी है कि सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।
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गोवर्धन परिक्रमा
हेमा मालिनी ने अब संसद में गोवर्धन पर्वत के संरक्षण और विकास का मुद्दा उठाया है। गोवर्धन परिक्रमा जगप्रसिद्ध है। 21 किलोमीटर लम्बी परिक्रमा करने के लिए हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि 60 साल पहले तक गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर 370 वॉटर बॉडीज थीं, जो अब समाप्त हो गई हैं या हो रही हैं। वॉटर बॉडीज पर अवैध कब्जे हो गए हैं। मानसी गंगा, राधा कुंड और कुसुम सरोवर देखने लायक हैं। श्रद्धालु इनमें स्नान करते हैं। कार्तिक मास में तो हजारों श्रद्धालु नियमित सेवा करते हैं। जल का आचमन करते हैं और फिर बीमार हो जाते हैं। तीनों ही स्थानों पर जल आचमन योग्य नहीं है। गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सीमा क्षेत्र में है। ऐसे में केन्द्र सरकार को आगे आना होगा। दोनों राज्यों में समन्वय बन सकता है अगर हेमा मालिनी की मांग के अनुसार श्री गोवर्धन जी विकास न्यास का गठन हो जाए।
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आम जनता की राजनीति नहीं कर सकतीं
यहां यह बताना भी समीचीन होगा कि हेमा मालिनी आम जनता की राजनीति नहीं कर सकती हैं। आम जनता की राजनीति करने के लिए उन्हें मथुरा में स्थाई रूप से रहना होगा। लोगों से सतत संपर्क स्थापित करना रहना होगा। लोगों के सुख और दुख में सहभागिता करनी होगी। प्रत्येक विवाह समारोह में शामिल होना होगा। हेमा मालिनी यह कभी नहीं कर सकती हैं। इसलिए संसद में मथुरा के विकास के मुद्दे उठाकर यह प्रदर्शित करना चाहती हैं कि उन्हें जनता की चिन्ता है। वैसे हेमा मालनी ने जो मुद्दे उठाए हैं, उनका आम जनता से भी वास्ता है। गोवर्धन परिक्रमा से स्थानीय लोग भी लाभान्वित होते हैं। अगर यहां समुचित इंतजामात नहीं किए गए तो मथुरा और वृंदावन की परिक्रमा की तरह गोवर्धन परिक्रमा भी नष्ट हो जाएगी।
Published on:
06 Dec 2019 06:44 pm
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