25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रामनवमी विशेषः श्रीराम का जन्म नहीं हुआ था, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, वीडियो में सुनिए श्रीराम स्तुति

जो श्रीराम की स्तुति इसी भाव से करते हैं, उन्हें बैकुंठ धाम मिलता है। फिर ऐसे जीव जीवन और मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।

3 min read
Google source verification

आगरा

image

Dhirendra yadav

Apr 13, 2019

ram navami

ram navami

आगरा। रामनवमी 13 और 14 अप्रैल को है। भगवान श्रीराम सबकी मनोकामना पूरी करते हैं। इस बार श्रीराम पूजा का अभिजीत मुहूर्त है। पूजा के दौरान श्रीराम की स्तुति करें। श्रीमनःकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी का कहना है कि भगवान राम का जन्म नहीं हुआ, वे प्रगट हुए थे। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में यही लिखा है। जो श्रीराम की स्तुति इसी भाव से करते हैं, उन्हें बैकुंठ धाम मिलता है। फिर ऐसे जीव जीवन और मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।

रामनवमी पर्व तिथि व मुहूर्त 2019

नवमी तिथि का आरंभ- 13 अप्रैल 2019 दिन शनिवार को सुबह 8 बजकर 59 मिनट से लेकर 14 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा

राम नवमी पूजा अभिजीत शुभ मुहूर्त- 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 12 मिनट तक।

श्रीराम स्तुति-1

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।

हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।

लोचन अभिरामा तनु घनश्याम निज आयुध भुज चारी।

भूषन बनमाला नयम बिसाला सोभासिंधु खरारी।।

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।

माया गुन गयानतीत अमाना बेद पुरान भनंता।।

करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।

सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रों प्रति बेद कहै।

मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै।।

उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।

कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा।

कीजै सिसुलीला अति प्रियशीला यह सुख परम अनूपा।।

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।

यह चरित जे गावहिं हरि पद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।

श्रीराम स्तुति-2

दोपहर 12 बजे भगवान श्रीराम चन्द्र जी का जन्मोत्सव मनाने के बाद राम स्तुति का पाठ करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती हैं।

श्री राम स्तुति श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं ।

नवकंज-लोचन, कंज-मु , कर-कंज पद कंजारुणं ।।

कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद सुंदरं ।

पट पीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरं ।।

भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्यवंश-निकन्दनं ।

रघुनंद आनँदकंद कोशलचंद दशरथ-नन्दनं ।।

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं ।

आजानुभुज शर-चाप-धर, संग्राम-जित-खरदूषणं ।।

इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनं ।

मम ह्रदय-कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनं ।।

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो ।

करुना निधान सुजान सीलू सनेहु जानत रावरो ।।

एहि भाँति गौरी असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली ।

तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली ।।

जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।

मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ।।

भावार्थ

हे मेरे मन तु कृपालु श्रीरामचंद्रजी का भजन कर, वे संसार के जन्म-मरणरूप दारुण भय को दूर करने वाले हैं, उनके नेत्र नव-विकसित कमल के सामान हैं, मुख-हाथ और चरण भी लाल कमल के सदृश हैं ।

उनके सौन्दर्य की छटा अगणित कामदेवों से बढ़कर है, उनके शरीर का नवीन नील-सजल मेघ के जैसा सुन्दर वर्ण है, पीताम्बर मेघरूप शरीरों में मानों बिजली के सामान चमक रहा है, ऐसे पावन रूप जानकी पति श्रीरामजी को मैं नमस्कार करता हूँ ।।

हे मेरे मन, दीनों के बन्धु, सूर्य के सामान तेजस्वी, दानव और दैत्यों के वंश का समूल नाश करने वाले, आनंदकंद, कौशल-देशरूपी आकाश में निर्मल चंद्रमा के सामान दशरथनंदन श्रीराम का भजन कर

जिनके मस्तक पर रत्न-जटित मुकुट, कानों में कुंडल, भाल पर सुन्दर तिलक और प्रत्येक अंग में सुन्दर आभूषण सुशोभित हो रहे हैं, जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी हैं, जो धनुष-बाण लिए हुए हैं, जिन्होंने संग्राम में खर-दूषण को जीत लिए है ।

जो शिव, शेष, और मुनियों के मन को प्रसन्न करने वाले और काम, क्रोध, लोभादि शत्रुओं का नाश करने वाले हैं; तुलसीदास प्रार्थना करते हैं की वे श्री रघुनाथजी मेरे हृदयकमल में सदा निवास करें ।

संबंधित खबरें

जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही स्वभाव से ही सुन्दर सांवला वर (श्रीरामचन्द्रजी) तुमको मिलेगा । वह दया का खजाना और सुजान (सर्वज्ञ) है, तुम्हारे शील और स्नेह को जानता है ।

इस प्रकार श्रीगौरीजी का आशीर्वाद सुनकर जानकीजी समेत सभी सखियाँ ह्रदय में हर्षित हुईं । तुलसीदासजी कहते हैं- भवानीजी को बार-बार पूजकर सीताजी प्रसन्न मन से राजमहल लौट चलीं ।

गौरी जी को अनुकूल जानकर सीता जी के ह्रदय में जो हर्ष हुआ वह कहा नहीं जा सकता । सुन्दर मंगलों के मूल उनके बायें अंग फड़कने लगे।

UP News से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Uttar Pradesh Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर ..

UP Lok sabha election Result 2019 से जुड़ी ताज़ा तरीन ख़बरों, LIVE अपडेट तथा चुनाव कार्यक्रम के लिए Download करें patrika Hindi News App.