
colonel vijay tomar
आगरा। भारतीय सेना में कर्नल रहे विजय तोमर का कहना है कि सेना से अवकाश लेने के बाद मैं संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में आया और मैं संघियों को राष्ट्रवादी मानता हूं। इसी कारण मैंने संघ से शुरूआत की है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति जो हिन्दुस्तान में रह रहा है, एक हिन्दुस्तानी है, राष्ट्रवादी है। वे वॉट्सऐप ग्रुप नेशन फर्स्ट द्वारा आयोजित दीवाली मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। चौधरी गार्डन, विभवनगर में यह कार्यक्रम हुआ।
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मौलवियों के न आने का मलाल
उन्होंने बताया कि आगरा कॉलेज में भारतीय शिक्षण मंडल का कार्यक्रम कराया था। यह शिक्षकों का कार्यक्रम था। खुद की संस्कृति से जोड़कर आगे बढ़ना चाहते थे। 10 मदरसों में मैं स्वयं निमंत्रण पत्र लेकर गया। मैंने कहा कि शिक्षण मंडल के कार्यक्रम में आइए और देखिए कि आम मुसलमान कैसे साथ जुड़ सकता है। ईसाइय़ों के पास भी गए। आगरा में 117 मदरसे हैं। एक भी मौलवी नहीं आया। ईसाई आए। वे यह भूल गए कि एक फौजी यह कार्यक्रम करा रहा है, जिसका एकमात्र उद्देश्य है हिन्दुस्तान।
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सिर्फ राष्ट्रवाद
कर्नल विजय तोमर ने कहा कि आमतौर पर नेशनल फर्स्ट ग्रुप में सक्रिय नहीं हूं। इतने गंध और फैलाव के बीच भी सिर्फ भारतीय सेना ही बची है, जिसको हो सकता है कोई भी राजनीतिक दल अपने लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करे। यही वह कील है, जिसके आसपास पूरा जहाज बनता है। टैंक में चार आदमी होते हैं। 10 लीटर पानी होता है। सबकुछ इसी से करना होता है। इस तरह के संस्थान में हम रहे हैं। दुनिया में एक कबीला ऐसा है, जिसे फौज कहते हैं। यह एक ही भाषा जानता है और वह है राष्ट्रवाद। व्यक्तिगत लेकर विद्वेष मानते हैं तो राष्ट्रवाद पीछे रह जाता है। आपकी व्यक्तिगत कुंठाएं बाहर आने लगती है, जिसे रोकने की जरूरत है।
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चुनाव के वक्त पता चला कि मैं ठाकुर हूं
उन्होंने यह भी बताया कि लोकसभा चुनाव के समय जब मेरे नाम पर विचार हुआ, तब पता चला कि मैं ठाकुर हूं। मैंने यह बात भाजपा के संगठन मंत्री सुनील बंसल भी कहा कि आज जाति से कर्नल हार गया। आज की राजनीति पर उन्होंने यह करारा कटाक्ष किया।
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सेना का एक ही धर्म- तिरंगा
कार्यक्रम में कर्नल जीएम खान ने कहा कि भारतीय सेना में कोई धर्म नहीं होता है। एक ही धर्म है और वह है तिरंगा। कर्नल सुरेन्द्र रावत ने भारतीय सेना के बारे में महत्वूर्ण जानकारी दी। समाजसेवी रवीन्द्रपाल सिंह टिम्मा ने कहा कि उनके पिता सेना में थे और टैंक बनाए। संचालन मेहताब खान एडवोकेट कर रहे थे। कार्यक्रम का संयोजन कर्मल जीएम खान, मेहताब खान और शायर अमीर अहमद एडवोकेट ने किया। उन्हीं की पहल पर यह कार्यक्रम हुआ।
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Updated on:
11 Nov 2018, 9:29 AM IST
Published on:
11 Nov 2018, 9:29 AM IST
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