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होम्योपैथी के 25 हजार विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा और छात्रवृत्ति का मिलेगा लाभ

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि होम्योपैथी और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को लेकर शिक्षा, शोध और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। व्यक्ति की मानसिक स्थिति और विचारों का उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। क्रोध, ईर्ष्या और असंतोष जैसे विकार जीवनशैली और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने चिकित्सकों और विद्यार्थियों से अपनी चिकित्सा पद्धति का गंभीरता से अध्ययन कर स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने का की अपील की। स्वास्थ्य राज्यमंत्री पानशेरिया ने कहा कि होम्योपैथी और आयुर्वेद के क्षेत्र में नए शोध तथा विश्वविद्यालयों के सहयोग से होने वाले प्रयास युवा पीढ़ी के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। उन्होंने अनियमित खानपान और जीवनशैली के प्रति चिंता जताते हुए पारंपरिक शुद्ध आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
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25,000 Homeopathy Students to Benefit from Free Education and Scholarships

एमओयू पर किए हस्ताक्षर।

आणंद. गुजरात में होम्योपैथी शिक्षा को प्रोत्साहन देने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार को राज्य के छह विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल से 20 से 25 हजार होम्योपैथी विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा और छात्रवृत्ति का लाभ मिलने की उम्मीद है। जिले के वल्लभ विद्यानगर में राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता और स्वास्थ्य राज्यमंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया की विशेष उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए । साथ ही छात्रवृत्ति योजनाओं के शुभारंभ और सेवा संकल्प अभियान नशामुक्त युवा का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

होम्योपैथी शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने पर जोर

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि होम्योपैथी और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को लेकर शिक्षा, शोध और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। व्यक्ति की मानसिक स्थिति और विचारों का उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। क्रोध, ईर्ष्या और असंतोष जैसे विकार जीवनशैली और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने चिकित्सकों और विद्यार्थियों से अपनी चिकित्सा पद्धति का गंभीरता से अध्ययन कर स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने का की अपील की।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री पानशेरिया ने कहा कि होम्योपैथी और आयुर्वेद के क्षेत्र में नए शोध तथा विश्वविद्यालयों के सहयोग से होने वाले प्रयास युवा पीढ़ी के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। उन्होंने अनियमित खानपान और जीवनशैली के प्रति चिंता जताते हुए पारंपरिक शुद्ध आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

क्रॉस प्रैक्टिस को बताया अनुचित

सैमुअल हैनिमैन एकेडमी फॉर होम्योपैथी (शाह) के संस्थापक डॉ. कृतिक शाह ने बताया कि छह विश्वविद्यालयों के साथ हुए एमओयू से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने होम्योपैथी में महिला चिकित्सकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने शिक्षा को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने की पहल का स्वागत किया। वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए)- गुजरात के अध्यक्ष डॉ. जितेश देसाई ने होम्योपैथी और एलोपैथी की मिश्रित चिकित्सा पद्धति यानी क्रॉस प्रैक्टिस को अनुचित बताते हुए चिकित्सकों से अपनी विशेषज्ञता के अनुसार उपचार करने की अपील की। इस अवसर पर राज्यपाल और स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने चार विशेष शाह छात्रवृत्ति योजनाओं तथा डॉ. कृतिक शाह द्वारा लिखित ई-बुक ‘द हैनिमैन्स डिजिटल ऑर्गेनन ऑफ मेडिसिन’ का लोकार्पण किया। छात्रवृत्ति योजनाओं का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, क्रॉस प्रैक्टिस पर रोक, नए चिकित्सकों को मार्गदर्शन और शिक्षकों को प्रोत्साहन देना है।

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