बहुत रोचक है अजमेर..यहां पनपे बाहर से आए लोग, पिछड़ गए यहां के जन्मे

बहुत रोचक है अजमेर..यहां पनपे बाहर से आए लोग, पिछड़ गए यहां के जन्मे

raktim tiwari | Publish: Oct, 14 2018 08:15:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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अजमेर.

जिले का राजनीतिक इतिहास यूं तो खासा लंबा रहा है। यहां से कई कद्दावर नेता जयपुर व दिल्ली तक अपना डंका बजा चुके हैं। यही नहीं अजमेर का अपना एक अलग महत्व यूं भी कहा जा सकता है कि जब प्रदेश में सभी रियासतों का विलीनीकरण हो गया लेकिन मेरवाड़ा स्टेट सबसे अंत में राजस्थान मेंविलय हुई। यहां के मुख्यमंत्री व मंत्री अलग हुआ करते थे।

1956 में विलय के बाद राजस्थान बना। राजधानी केवल मात्र इस लिए नहीं बन सका क्यों कि यहां पानी व भौगोलिक परिस्थितियां अनुकुल नहीं थीं। चारों ओर पहाड़ होने के कारण शहर को राजधानी नहीं बनाया जा सका।

इसके बदले में उसे राजस्व मंडल, टैक्स बोर्ड व राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दफ्तर अजमेर में दिए गए। यह तो हुई शहर की बात। अब राजनीतिज्ञों की बात की जाए तो यहां कई नेता हुए। जिन्होंने अच्छे औहदे पाए। कुछेक को छोड़ अधिकांश नेता वहीं राजनीतिक क्षेत्र में आगे बढ़े जिन्होंने वर्षों तक जिले की राजनीति में अपना वर्चस्व रखा।

राजनीतिक क्षितिज में वर्षों छाए

ओंकार सिंह लखावत - लखावत राज्य सभा सांसद, धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा न्याससदर के अतिरिक्त संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर रहे। अजमेर में अटल बिहारी वाजपेयी की यात्रा हो या हालिया नरेन्द्र मोदी की मुख्य संयोजक व मंच संचालन लखावत के हाथ में ही रहा।

सचिन पायलट - कांग्रेस के युवा नेताओं में राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले सचिन पायलट ने अपने दिवंगत पिता राजेश पायलट की विरासत को आगे बढ़ाया। सचिन पायलट दो बार सांसद व गत कांग्रेस सरकार में अजमेर से 2009 से 2014 तक सांसद रहते हुए केन्द्रीय दूरसंचार व वाणिज्यि मामलात के मंत्री रहे।
सुशील कंवर पलाड़ा - सुशील कंवर पलाड़ा 2008 के बाद 2009 -10..... जिला प्रमुख बनीं। इसके बाद वर्ष 2013 में इन्हें मसूदा से भाजपा ने विधायक का टिकिट दिया। वर्तमान में वह मसूदा से विधायक हैं। पति भंवर सिंह के सहयोग से इ न्होंने क्षेत्र में अच्छी पकड़ बनाई। भंवर सिंह का राजपूत समाज में भी प्रभाव है।

विष्णु मोदी - जयपुर से आए खान व्यवसाय से जुड़े उद्यमी। धन बल के रूप में अजमेर से कांग्रेस की सीट पर वर्ष ........में अजमेर के सांसद बने इसके बाद पार्टी बदली और मसूदा से भाजपा का टिकिट पाने में सफल रहे।
जगदीप धनखड़ - जयपुर मे वकालत का व्यवसाय करने वाले धनखड़ अजमेर के सांसद बने। इन्होंने अजमेर की सत्ता पर कांग्रेस के टिकिट पर चुनाव लडकऱ जीते।

वासुदेव देवनानी - उदयपुर में इंजीनिरिंग कॉलेज में व्याख्याता रहे वासुदेव देवनानी संघनिष्ठ व नागपुर स्थित मुख्यालय में खासे रसूखातों के चलते गत तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी रहे। वह मौजूदा राज्य सरकार में वह शिक्षा राज्यमंत्री हैं।

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