Change: घटते अवसर और पैकेज, मैनेजमेंट कोर्स से दूर हो रहे युवा

raktim tiwari

Updated: 13 Oct 2019, 07:15:00 AM (IST)

Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

कॅरियर (career) और नौकरी (service) के लिहाज से सर्वोच्च माने जाने वाले मैनेजमेंट कोर्स में युवाओं की रुचि घट रही है। गुजरे 10 साल से मैनेजमेंट कोर्स (management course) में पर्याप्त प्रवेश नहीं होना इसका परिचायक है। नौकरियों के घटते अवसर, पैकेज में कमी इसकी खास वजह है। कई संस्थान तो कोर्स बंद कर चुके हैं। यही स्थिति रही तो मैनेजमेंट कोर्स पर तलवार लटक सकती है।

यह हैं हालात
अजमेर के महिला एवं बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज (engineering college) में मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट कोर्स संचालित है। बॉयज कॉलेज में प्रबंधन की 120 सीट हैं। सात वर्ष पूर्व राजस्थान मैनेजमेंट एप्टीट्यूटड टेस्ट (आरमेट) से दाखिले होने तक यहां हालात ठीक थे। केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा सीमेट (CMAT) से दाखिले होने लगे तो स्थिति बदल गई। महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में तो कोर्स तकरीबन बंद हो गया है।

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विश्वविद्यालय में भी बेहतर नहीं हालात
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) में भी मैनेजमेंट कोर्स संचालित है। यहां भी सीमेट से प्रवेश होते हैं। दस साल पहले तक पर्याप्त दाखिले होते थे। लेकिन अब विद्यार्थियों का रुझान नहीं है। यहां मैनेजमेंट विभाग (management dept) में तीन प्रोफेसर और दो रीडर कार्यरत हैं। इसके अलावा लघु उद्यमिता एवं कौशल विकास केंद्र में भी एमबीए कोर्स संचालित है।

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यूं घटता जा रहा है ग्राफ
-2002-03 के बाद दुनिया में आई वैश्विक मंदी
-कम्पनियों में अच्छे पैकेज नहीं मिलना
-कम्पनियों-संस्थानों को मनमाफिक दक्ष युवा नहीं मिलना
-मैनेजमेंट क्षेत्र में नौकरियों के अवसर लगातार कम होगा

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स्किल और शॉर्ट टर्म बेहतर विकल्प
बदलते दौर में विद्यार्थी स्किल (skill), जॉब ओरिएन्टेड (job oriented), डिप्लोमा (diploma), इंजीनियरिंग (engineering) और शॉर्ट टर्म कोर्स (short term) पसंद करने लगे हैं। कैंपस प्लेसमेंट में भी कम्पनियां इन्हीं कोर्स के युवाओं का चयन करने लगी हैं। केवल मैनेजमेंट या अन्य कोर्स की एकल डिग्री के बजाय मल्टी डिग्री-कोर्स करने को भी युवा पीढ़ी पसंद कर रही है।

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इन संस्थानों में कोर्स बंद
-सावित्री कन्या महाविद्यालय
-श्रमजीवी कॉलेज
-निजी कॉलेज

10-15 साल पहले तक एमबीए युवाओं में खासा रुझान था। देश के नामचीन आईआईएम और निजी मैनेजमेंट संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेज में एमबीए की सीट भर जाती थी। वैश्विक स्तर पर अब विद्यार्थियों और युवाओं का रुझान घट रहा है। आर्थिक मंदी, पैकेज नहीं मिलना और घटते नौकरियों के अवसर इसकी बड़ी वजह है।
प्रो. शिव प्रसाद, मैनेजमेंट विभाग मदस विश्वविद्यालय

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