
BJP internal survey
चंद्रप्रकाश जोशी. अजमेर.
विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से टिकट वितरण से पूर्व अपनाई गई लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई। दावेदारों में अंदर तो एकराय बनी लेकिन बाहर दोराय के अलाप गूंजे। इसकी वजह भी यही कि संगठन के आखिर ‘शिल्पकार’ कौन रहे? अब शिल्पकार को नजरअंदाज कर भी कोई दूसरा नाम पहले नम्बर पर नहीं लिख सकता। हुआ भी यही अधिकांश ने पहले नम्बर पर शिल्पकार का ही नाम लिखा।
जयपुर में अजमेर जिले की रायशुमारी कार्यक्रम में जिस तरह से दावेदारों के चयन/ सुझाव की प्रक्रिया अपनाई गई इससे कुछ प्रमुख दावेदार की तो बांछें खिल गई मगर कुछ इसे सिर्फ फोरी औपचारिता मात्र बताया। दावेदारों का मानना रहा कि जिलों एवं विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से जिन पदाधिकारियों को रायशुमारी के लिए बुलाया गया उनमें अधिकांश वे हैं जो वर्तमान पद पर काबिज हैं।
कुछ वे हैं जो पिछले 10 वर्षों में इन पदों पर रहे उन्होंने लीक से हटकर चयन नहीं किया। उन्होंने अपने शिल्पकार का ही नाम पहले स्थान पर रहा। इससे कुछ नए चेहरे एवं दावेदारों के चेहरे पर मायूसी देखने को मिली। हालांकि कई पुराने व वरिष्ठ दावेदारों को पूर्व पदाधिकारियों व पूर्व जनप्रतिनिधियों की ओर से पूरा सहयोग मिला। अब यह बात अलग है कि ये उनके बाहरी दावे हैं, हकीकत तो डिब्बे में बंद हो गई।
पर्ची की गोपनीयता पर भी उठे सवाल!
रायशुमारी के तहत कुछ पदाधिकारियों ने दावेदारों के नजदीकियों को बता दिया कि देखो-‘भाई साहब’ का नाम पहले नम्बर पर लिखा है। वहीं कुछ ने दूसरे व तीसरे दावेदारों को पहले स्थान पर देने का संकेत दिया।
खास चर्चा यह रही कि पर्ची की गोपनीयता को लेकर कई पदाधिकारी गंभीर नजर नहीं आए। यहां बढ़ गई दावेदारों की फौजनसीराबाद एवं मसूदा विधानसभा क्षेत्रों में दावेदारों की फौज तैयार गई। दावेदारों को उठाकर जब बाहर भेजा गया तो इनमें नसीराबाद व मसूदा के ज्यादा थे। पदाधिकारियों में चर्चा यह रही कि दो-तीन ही खास हैं बाकी तो सब हमारी जैसे ही हैं।
Published on:
31 Oct 2018 07:19 am
