
Ajmer Jail : हाई सिक्योरिटी जेल। फाइल फोटो पत्रिका
अजमेर। हाई सिक्योरिटी जेल की ऊंची दीवारों के पीछे आखिर क्या होता है? क्या वहां बंद गैंगस्टरों तक ब्रांडेड कपड़े-जूते पहुंचते हैं? क्या जेल के भीतर से मोबाइल के जरिए बाहर अपराध का नेटवर्क चलता है? और अगर ऐसा है तो कड़े सुरक्षा घेरे के बावजूद यह सब कैसे संभव है? इन सवालों को लेकर घूघरा स्थित हाई सिक्योरिटी जेल अब एक बंदी की किताब के कारण चर्चा में है। झुंझुनूं के हार्डकोर बंदी योगेश चारणवासी ने जेल में रहते हुए ‘जेल में ब्रांडेड कफन’ नाम से किताब लिखी है।
जनवरी 2026 में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित इस किताब में उसने हाई सिक्योरिटी जेल में अपने अनुभवों और वहां बंद हार्डकोर अपराधियों से जुड़े कई गंभीर दावे किए हैं। हालांकि जेल प्रशासन ने इन दावों की पुष्टि से इनकार किया है। बता दें कि यह वही जिले है, जिसमें 29 जून को कैदी विष्णु जाट ने जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की गला घोंटकर हत्या कर दी थी।
चारणवासी के अनुसार उसे 6 जून 2020 को झुंझुनूं जेल से हाई सिक्योरिटी जेल लाया गया था। एकांत सेल में रहते हुए उसने नियमित डायरी लिखना शुरू किया। जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए कागज और पेन पर उसने जेल के भीतर के अनुभव दर्ज किए। बाद में इन्हीं अनुभवों को किताब का रूप दिया। उसका दावा है कि किताब में राजस्थान के अलावा हरियाणा और उत्तरप्रदेश की जेलों के अनुभव भी शामिल हैं। चारणवासी के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 15 से अधिक मामले दर्ज हैं।
किताब में सबसे गंभीर दावे जेल के भीतर गैंगस्टरों के कथित प्रभाव और नेटवर्क को लेकर हैं। चारणवासी ने ब्रांडेड कपड़े और जूते पहुंचने, मोबाइल के जरिए बाहर संपर्क रखने और जेल से बाहर अपराध कराने के लिए नेटवर्क संचालित होने का दावा किया है। एक प्रहरी पर एक लाख रुपए लेकर मोबाइल उपलब्ध कराने का आरोप भी किताब में किया गया है। गैंगस्टरों के गर्लफ्रेंड और अन्य लोगों से मोबाइल पर बातचीत करने के दावे भी इसमें हैं।
किताब में 2021 के दौरान हाई सिक्योरिटी जेल में बंद रहे लॉरेंस बिश्नोई और अन्य कुख्यात बंदियों का भी उल्लेख है। चारणवासी का दावा है कि कुछ बंदियों ने लॉरेंस से मिलने के लिए 20 दिन तक भूख हड़ताल की। किताब में गैंगों के बीच रिश्तों और कथित नेटवर्क का भी जिक्र है।
हार्डकोर बंदी की किताब ऑनलाइन प्रकाशित होने की जानकारी संज्ञान में आई है। इसके प्रकाशन की अनुमति किसने दी, इसकी जानकारी नहीं है। बंदियों को सामान्य प्रक्रिया के तहत कागज, कॉपी, पेन और पढ़ने के लिए किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। किताब कब, कैसे बाहर गई और ऑनलाइन प्रकाशित हुई, इसकी जानकारी नहीं है।
&पारस जांगिड़, अधीक्षक, हाई सिक्योरिटी जेल, अजमेर
Updated on:
26 Aug 2026 10:32 am
Published on:
26 Aug 2026 10:32 am
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