
garib nawaz urs
अजमेर. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (khwaza moinuddin chishty) के 808 वें उर्स (annual urs) के झंडे की तारीख इस माह दिखने वाले चांद से तय होगी। जमादि उल आखिर माह के चांद के बाद ही फरवरी के दूसरे पखवाड़े में बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने का कार्यक्रम तय होगा।
सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का 808 वां उर्स फरवरी में मनाया जाएगा। परम्परानुसार भीलवाड़ा (bhilwara) का गौरी परिवार (gauri family) झंडा लेकर अजमेर आएगा। झंडे को बुलंद दरवाजे पर चढ़ाने की तिथि इस माह दिखने वाली चांद (moon) से तय होगी। यह महीना मुस्लिम कलैंडर के अनुसार जमादि उल आखिर कहलाता है।
रजब का चांद दिखने के बाद उर्स
रजब का चांद दिखने के बाद फरवरी में सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के 808 वें उर्स के रसूमात (traditions) शुरू होंगे। रजब की पहली से छठी तारीख विभिन्न कार्यक्रम होंगे। उर्स के दौरान होने वाली महफिल (mahfil) में परम्परानुसार दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन सदारत करेंगे। दीवान मध्यरात्रि को आस्ताना शरीफ में प्रवेश कर मजार शरीफ पर गुलाब जल (rose water) और केवड़े से गुस्ल देंगे। इस दौरान देश की विभिन्न खानकाहों के सज्जादानशीन, सूफी, मशायख और जायरीन मौजूद रहेंगे।
गूंजेंगे शादियाने
दरगाह परिसर में नगाड़े और शादियाने गूंजेंगे। बड़े पीर की पहाड़ी की परम्परानुसार तोप दागकर उर्स की शुरुआत का पैगाम दिया जाएगा। रजब की पहली तारीख से छह रजब तक ख्वाजा गरीब नवाज का उर्स चलेगा। छठी शरीफ की रस्म यानि छोटे कुल के दिन जायरीन केवड़े और गुलाब जल से दरगाह की धुलाई करेंगे। इसके बाद बड़े कुल की रस्म होगी।
Updated on:
02 Jan 2020 09:18 am
Published on:
02 Jan 2020 09:18 am
