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Good News: साइबर अपराधों से बचाएगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

इंजीनियरिंग कॉलेज में बनेगा स्पेशल सेंटर। पुलिस और आमजन की करेगा साइबर केस में मदद।

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cyber center

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

ऑनलाइन ठगी और साइबर क्राइम मामले पुलिस और लोगों का सिरदर्द बढ़ा रहे हैं। हैकर्स कभी केवाईसी अपडेट तो कभी ऑनलाइन लिंक-एप के जरिए लोगों के खातों से रकम उड़ा रहे हैं। ऐसे मामलों से निबटने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज में जल्द स्पशेल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने जा रहा है। यह साइबर केस मामलों को सुलझाने में पुलिस और लोगों की मदद करेगा।

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ई-बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट- ट्रांजिक्शन को बढ़ावा देने के साथ देश में ऑनलाइन क्राइम भी बढ़ गया है। अजमेर भी इसमें पीछे नहीं है। यहां हर महीने ऑनलाइन ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें ठगों द्वारा बड़ी रकम उड़ाने के मामले ही पुलिस में दर्ज हुए हैं। छोटी रकम के कई मामलों में रिपोर्ट भी दर्ज नहीं होती है। ज्यादातर मामलों में लोगों द्वारा ठगों को ओटीपी और अन्य जानकारियां देने, सुरक्षा फीचर्स का इस्तेमाल नहीं करना सामने आया है। लिहाजा इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का फैसला किया है।

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बैठेंगे साइबर एक्सपर्ट, होंगे हाईटेक उपकरण
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का कामकाज आईटी और साइबर एक्सपर्ट संभालेंगे। इसमें हाईटेक उपकरण लगेंगे। यह विशेषज्ञ हैकिंग, ऑनलाइन साइबर क्राइम-लूट मामलों की तह तक जाएंगे। पुलिस के साइबर सेल और एक्सपर्ट की मदद भी ली जाएगी। ऑनलाइन लूट का शिकार व्यक्ति चाहे तो सेंटर की मदद ले सकेगा। पुलिस द्वारा भेजे गए मामलों को भी सेंटर सुलझाएगा।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग-सरकार से मदद
कॉलेज ने सेंटर का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग-सरकार को भेजा जाएगा। कॉलेज में सेंटर के लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर खरीदे जाने हैं। यह सेंटर राज्य और राष्ट्रीय स्तर का होगा। आईआईटीके प्रोफेसर-रिसर्च स्कॉलर भी यहां कामकाज कर सकेंगे।

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बढ़ रही है साइबर यातना...
देश-दुनिया में साइबर यातना (इंटरनेट आधारित प्रताडऩा) भी बढ़ रही है। साइबर टेक्नोलॉजी के माध्यम से लोगों को भडक़ाया जा रहा है। साइबर स्टॉकिंग में टैक्सेट मैसेज, फे्रंड रिक्वेस्ट, स्टेटस पर नजर ्रकना, साइबर स्पाइंग में चेंजिंग रूम, वॉशरूम, होटल पर नजर, साइबर बुलिंग में महिलाओं से दोस्ती-नजदीकी बढ़ाना, निजी फोटो मांगने जैसी यातना शामिल हैं।

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थोड़ी से चूक और बन जाते हैं शिकार
-फर्जी कॉलर की बातों में आकर बता देते हैं ओटीपी
-कर लेते हैं कॉलर से बैंक खाते के नंबर, पिन
-फंसते हैं ठगों के फर्जी क्रेडिट/डेबिट कार्ड बनाने के जाल में
-मोबाइल में सुरक्षा एप का नहीं करते इस्तेमाल


ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर क्राइम लगातार बढ़ रहा है। कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। यह साइबर क्राइम, हैकिंग केस को सुलझाने के अलावा पुलिस के साथ मिलकर जागरुकता अभियान चलाएगा।
उमाशंकर मोदानी, प्राचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या