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राजस्थान सरकार की रोजगार योजना में अब तक सिर्फ 1 हजार रजिस्ट्रेशन

Indra Gandhi Rojgar Guarantee Yojna: मनरेगा की तर्ज पर शहरी क्षेत्र के जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना की शुरू की है। इस योजना का व्यापक प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है ताकि शहर में भी श्रमिक वर्ग बेरोजगार नहीं रहे।

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क/अजमेर. Indra Gandhi Rojgar Guarantee Yojna: मनरेगा की तर्ज पर शहरी क्षेत्र के जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना की शुरू की है। इस योजना का व्यापक प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है ताकि शहर में भी श्रमिक वर्ग बेरोजगार नहीं रहे। मनरेगा में सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को ही वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी है। राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्र के लोगों को भी गारंटी वाला रोजगार उपलब्ध करवाने की घोषणा की। सरकार के महंगाई राहत शिविरों में जिन योजनाओं में रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किया गया, उनमें इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना भी शामिल हैं।

अजमेर के प्रशासनिक तंत्र को उम्मीद थी कि श्रमिक वर्ग बड़ी संख्या में योजना में रजिस्ट्रेशन करवाएगा। लेकिन छह लाख की आबादी वाले अजमेर शहर में अब तक एक हजार लोगों ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया है। प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन के साथ ही जॉब कार्ड भी जारी कर दिए हैं। ताकि किसी भी श्रमिक को रोजगार प्राप्त करने में परेशानी नहीं हो। लेकिन इस योजना में रोजगार लेने के लिए मात्र एक हजार लोग ही आए हैं। इनमें भी अधिकांश महिलाएं हैं। यह संख्या बताती है कि इस योजना में रोजगार प्राप्त करने में श्रमिक वर्ग की रुचि नहीं है। राज्य सरकार की मंशा को देखते हुए अजमेर नगर निगम ने घोषणा की थी कि शहरी रोजगार गारंटी योजना में बरसात के दिनों में शहर में दो लाख पौधे लगाए जाएंगे। पौधे लगाने का काम इसी योजना के श्रमिक करेंगे। लेकिन रोजगार प्राप्त करने वाले श्रमिकों की संख्या को देखते हुए प्रतीत होता है कि निगम को पौधे लगाने के लिए अन्य विकल्प तलाशने होंगे।
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योजना से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार ने शहरी क्षेत्र के बेरोजगार श्रमिकों को रोजगार देने की घोषणा तो कर दी, लेकिन क्रियान्विति प्रभावी नहीं की। असल में शहर में निर्माण कार्य करने वाले बेलदार को भी प्रतिदिन 400 रुपए मिल जाते हैं। दुकानों, यहां तक कि चाय के ठेलों पर काम करने वाले मजदूर को भी चार सौ रुपए मजदूरी मिल जाती है। जो श्रमिक किसी क्षेत्र में थोड़ा प्रशिक्षित होता है तो उसे प्रतिदिन 600 रुपए तक मिल जाते हैं। जबकि शहरी रोजगार गारंटी में मात्र 260 रुपए मजदूरी मिलती है। कार्य भी सुबह छह से दोपहर दो बजे तक करना होता है। हालांकि ऐसे श्रमिकों से कार्य भी हल्का ही करवाया जाता है।
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इसमें स्वच्छता, वृक्षारोपण, उद्यानिकी, नर्सरी आदि के कार्य शामिल हैं। लेकिन मजदूरी की राशि कम होने के कारण लोग उपलब्ध नहीं हुए हैं। जिन लोगों ने शिविरों में इस योजना के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन करवाया है वे भी रोजगार प्राप्त करने के लिए नहीं आ रहे। अजमेर शहर के साथ-साथ जिले के उपखंड के शहरों में भी कमोबेश यही स्थिति है। किशनगढ़ में सात हजार ने रजिस्ट्रेशन करवाया, लेकिन रोजगार के लिए 750 लोग ही आए। इसी प्रकार ब्यावर में पांच हजार 300 रजिस्ट्रेशन के मुकाबले में एक हजार, केकड़ी में ढाई हजार के मुकाबले में 700, सरवाड़ में तीन हजार के मुकाबले में सौ तथा पुष्कर में 900 रजिस्ट्रेशन के मुकाबले में 160 ही उपलब्ध हुए हैं। सरकार से जुड़े लोगों का भी मानना है कि शहरी क्षेत्र में मजदूरी की राशि बहुत कम है, इसलिए रजिस्ट्रेशन के बाद भी लोग उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इस योजना में मजदूरी की राशि बढ़ाए जाने की जरूरत है।