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आरपीएससी ने फूंके सवा तीन करोड़ रुपए, कोर्ट केस करा रहे वकीलों की चांदी

हर परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों के न्यायालयों याचिकाएं लगाने से बढ़ता आर्थिक बोझ
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अजमेर

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Rajesh

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Updated: 8 Oct 2017, 10:27 AM IST

rpsc

अजमेर

राजस्थान लोक सेवा आयोग की कार्य प्रणाली कितनी असंतोषजनक है इसका अंदाजा इसकी प्रत्येक स्तर पर होने वाली गड़बडि़यों से लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजन से लेकर परिणाम जारी करने तक इतनी त्रुटियां होती हैं कि अभ्यर्थियों को अदालतों की शरण लेनी पड़ रही है। बीते करीब 10 सालों में आरपीएससी को शीर्ष अदालतों में विचाराधीन विभिन्न प्रकरणों में करीब सवा तीन करोड़ रुपए की राशि वकीलों को फीस के रूप में अदा करनी पड़ी है। यही नहीं लीगल सैक्शन से कर्मचारी का यात्रा भत्ता व पेशियों पर वकीलों के पास जाने आदि के खर्च को जोड़ा जाए तो यह राशि और भी अधिक बनती है।

अभ्यर्थियों के न्यायालयों याचिकाएं लगाने से बढ़ता आर्थिक बोझ
आयोग की कई भर्ती परीक्षाएं अभ्यर्थियों के याचिकाएं दायर करने शीर्ष अदालतों में अटकती हैं और आयोग को पैनल लॉयर्स को न्यायिक प्रक्रिया के लिए फीस चुकानी पड़ती है। आंकड़े बताते हैं कि बीते चार सालों में आयोग ने दो करोड़ रुपए से अधिक राशि वकीलों को बतौर फीस अदा की। सूचना के अधिकार के तहत वर्ष 2001 से अब तक वकीलों व आयोग के पैनल लॉयर को अदा की गई फीस का ब्योरा मांगा गया। आयोग की ओर से दी गई अधिकृत जानकारी से पता चला है कि आयोग को पिछले करीब १०-12 सालों में सवा तीन करोड़ रुपए से अधिक वकीलों को बतौर फीस देने पड़े हैं। इसके बाद विभिन्न फैसलों में अदालतों ने आयोग को न केवल फटकार लगाई वरन लाखों रुपए जुर्माना भी भुगतना पड़ा।

आयोग की ओर से दी गई सूचना
कार्मिक विभाग के निर्देश व स्वीकृति अनुसार वकील को विधिक फीस देय होती है। वर्ष 2004 से अब तक हाईकोर्ट जयपुर , जोधपुर व सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को कुल ३ करोड़ 27 लाख २३ हजार 735 रुपए फीस अदा करा चुकी गई है। जबकि वर्ष-2001 से 04तक का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

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