
law college ajmer
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
प्रथम वर्ष के दाखिलों को लेकर लगातार 15 वें साल लॉ कॉलेज के वही हाल हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता और बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बिना दाखिले मुश्किल हैं। सरकार ने जल्द फैसला नहीं किया तो कॉलेज की मुसीबतें बढ़ेंगी।
लॉ कॉलेज को बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिली है। कॉलेज को प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता लेनी पड़ती है। सम्बद्धता पत्र और निरीक्षण रिपोर्ट बार कौंसिल को भेजी जाती है। कौंसिल की मंजूरी के बाद प्रथम वर्ष में प्रवेश होते हैं। इस बार भी कमोबेश हालात वैसे ही हैं।
...तो नहीं कर सकते दाखिले
बीसीआई को दी गई अंडर टेकिंग के अनुसार सरकार को अजमेर सहित अन्य लॉ कॉलेज में स्थाई प्राचार्य, पर्याप्त व्याख्याता और स्टाफ और संसाधन जुटाने हैं। शर्तें पूरी किए बगैर सत्र 2019-20 में दाखिलों की मंजूरी नहीं मिलेगी। पिछले चार सत्र में इन्हीं कारणों से प्रवेश में विलम्ब हो रहा है।
संसाधन और शिक्षकों की कमी
यूजीसी के नियमानुसार किसी भी विभाग में एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। लॉ कॉलेज में प्राचार्य सहित सात शिक्षक हैं। यहां के एक रीडर डेप्यूटेशन पर कॉलेज शिक्षा निदेशालय में तैनात हैं। कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार, और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
तीन साल की सम्बद्धता पर तलवार
बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विश्वविद्यालयों को लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता देने को कहा है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अपनी स्वायतत्ता छोडऩे को तैयार नहीं है। प्रस्ताव पर एकेडेमिक कौंसिल और प्रबंध मंडल में भी चर्चा नहीं हुई है।
Published on:
01 Jun 2019 07:14 am
