Mdsu: विश्वविद्यालय में ही जंचेंगी students की कॉपियां

Mdsu: विश्वविद्यालय में ही जंचेंगी students की कॉपियां
mdsu copies checking

raktim tiwari | Updated: 12 Oct 2019, 07:50:00 AM (IST) Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

परीक्षक जांच के बाद कॉपियां और गोपनीय लिफाफे में अवार्ड लिस्ट भेजते हैं। यह प्रक्रिया और वक्त खराब करने वाली है।

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

विद्यार्थियों की कॉपियों का महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) अब केंद्रीयकृत मूल्यांकन (centralized evalution) कराएगा। परिसर में ही शिक्षकों को बुलाकर कॉपियां जंचवाई जाएंगी। पूरक परीक्षाओं से इसकी शुरुआत होगी। वर्ष 2020 की सालाना परीक्षाओं में भी यही व्यवस्था अपनाई जाएगी।

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विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष पूरक (compartment) और सालाना परीक्षाएं (annual exam) कराता है। इसमें स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) विषयों के 3.50 लाख से ज्यादा विद्यार्थी बैठते हैं। अजमेर, नागौर, टोंक और भीलवाड़ा में 125 से ज्यादा परीक्षा केंद्र हैं। परीक्षा के बाद कॉपियों (copies) के सीलबंद बंडल विश्वविद्यालय पहुंचाए जाते हैं। यहां से गोपनीय-परीक्षा विभाग इन्हें परीक्षकों को जांचने भेजते हैं। परीक्षक जांच के बाद कॉपियां और गोपनीय लिफाफे में अवार्ड लिस्ट (award list) भेजते हैं। यह प्रक्रिया और वक्त खराब करने वाली है। इससे परिणाम जारी करने में भी विलंब होता है।

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कराएंगे केंद्रीयकृत मूल्यांकन
कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह नतीजों में देरी और खर्चीली मूल्यांकन प्रणाली (evalution process)के पक्षधर नहीं हैं। उन्होंने साल 2019 में हुई पूरक परीक्षाओं (compartment exam) की कॉपियों का केंद्रीयकृत मूल्यांकन (centralized checking) कराने का फैसला किया है। परिसर में ही सेवारत और सेवानिवृत्त शिक्षकों को बुलाकर कॉपियां जंचवाई जाएंगी। इससे परिणाम तुरंत जारी हो सकेंगे। 2020 की सालाना परीक्षाओं में भी लाखों कॉपियां परिसर (university campus) में ही जंचवाई जाएंगी।

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यह होंगे फायदे
विश्वविद्यालय का शिक्षकों तक कॉपियां भेजने का बचेगा खर्चा
-कॉपियों की गोपनीयता रहेगी बरकरार
-समय पर जारी हो सकेंगे विद्यार्थियों के नतीजे
-पुनर्मूल्यांकन परिणाम भी निकलेंगे समय पर

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जरूरत ऑनलाइन मूल्यांकन की...
सीबीएसई (cbse) सहित कई परीक्षा संस्थाएं वक्त के साथ हाईटेक (hitech) हो गई हैं। यह कॉपियों का कंप्यूट पर ऑनलाइन मूल्यांकन करा रही हैं। विश्वविद्यालय को इसकी शुरुआत करने की जरूरत है। हालांकि लाखों कॉपियों की ई-इमेज (E-emage) बनाने के लिए स्कैनर, परीक्षकों के लिए कंप्यूटर लेब (computer lab) बनानी पड़ेगी। लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विद्यार्थियों के हित में यह नवाचार करने जरूरी हैं।

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फैक्ट फाइल
मदस विश्वविद्यालय की स्थापना-1987
सम्बद्ध कॉलेज-275
कॉलेज में पंजीकृत विद्यार्थी: 3.50 लाख
कैंपस में अध्ययनरत विद्यार्थी: 800


परिणाम में विलंब और कॉपियां भेजने-मंगवाने जैसी परेशानियां बनी रहती हैं। केंद्रीयकृत मूल्यांकन इसका बेहतर विकल्प है। हम जल्द इसकी शुरुआत करने जा रहे हैं। परिसर में ही कॉपियां विश्वविद्यालय की निगरानी में जंचेंगी। यह विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी फायदेमंद रहेगा।
प्रो. आर. पी. सिंह, कुलपति मदस विश्वविद्यालय

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