
चन्द्र प्रकाश जोशी/दिलीप शर्मा
Rajasthan News : आमतौर पर घर परिवार में महिला को ‘गृहलक्ष्मी’ एवं घर की मालकिन का दर्जा तो दिया जाता है, लेकिन मालिकाना हक संबंधी दस्तावेज एवं कागज उसके नाम करवाने में पुरुष अभी भी अधिक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कुछ जगह महिलाओं के नाम प्रोपर्टी है, मगर निर्णय लेने का अधिकार पुरुषों के हाथ में ही है।
सरकार की ओर से पंजीयन पर महिलाओं को छूट के बावजूद बदलाव अभी नहीं आया है। परिवार की मुखिया के नाते सरकार ने जनआधार में विशेष सम्मान व पहचान दी है, लेकिन जमीनी दस्तावेज महिला के नाम करवाने के मामले में अभी भी सोच नहीं बदली है। कानून ने महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला के नाम रजिस्ट्री या अन्य पंजीयन कराने में स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी है, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं के नाम स्वामित्व संबंधी दस्तावेज नहीं बन रहे।
पंजीयन व मुद्रांक विभाग राजस्थान के बीते पांच साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो महिला के नाम रजिस्ट्री करवाने के मामले में 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि ही हुई है। इतने प्रचार-प्रसार के बावजूद बीते वर्ष की तुलना में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री कराने वाले दस्तावेजों की संख्या में मात्र एक प्रतिशत वृद्धि हुई है।
1- महिलाओं का कम पढ़ा-लिखा होना।
2- परिवार में घरेलू व सामाजिक जिम्मेदारियों का दबाव।
3- कानूनी पहलू भी यह वजह।
4- महिलाओं के नाम दस्तावेज करने के बाद पारिवारिक या पति से विवाद का भय।
निष्पादित दस्तावेज 2018 से 2025 तक
3,09,279 - 1,86,982
महिलाओं के पक्ष में - पुरुषों के पक्ष में
14.24 फीसदी - 85.76 फीसदी
महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम हों, खुद ही प्रोपर्टी खरीदें। अगर सशक्त, सक्षम होंगी तो खुद ही जमीन-मकान खरीद-बेच सकती हैं। शिक्षित महिला अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगी।
डॉ. देवकी मीना, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसपीसीजीसीए अजमेर
Published on:
15 May 2025 12:02 pm
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