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राजस्थान की कम पढ़ी-लिखी ग्रामीण महिलाएं बनी ‘सोलर मम्मा’, देश-विदेशों में तैयार कर रहीं इंजीनियर

Ajmer News: अजमेर जिले में समाज कार्य अनुसंधान केन्द्र तिलोनिया (बेयरफुट कॉलेज) में हमारी ग्रामीण महिलाएं सोलर इंजीनियर एवं सोलर मम्मा के नाम से अलग से पहचान बनाई है।

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चन्द्र प्रकाश जोशी

Barefoot College Tilonia: हमारी साक्षर एवं कम पढ़ी लिखी ग्रामीण महिलाएं देश ही नहीं विदेशी महिलाओं को भी सौर ऊर्जा का इंजीनियर बना रही हैं। पहले खुद ने प्रशिक्षण लिया अब हजारों देशी-विदेशी महिलाओं को सौर ऊर्जा के उपकरण बनाने का काम सिखा रही हैं। गांवों से शहरों की ओर पलायन रोकने में भी सौर ऊर्जा प्रशिक्षण कारगर साबित हुआ है।

अजमेर जिले में समाज कार्य अनुसंधान केन्द्र तिलोनिया (बेयरफुट कॉलेज) में हमारी ग्रामीण महिलाएं सोलर इंजीनियर एवं सोलर मम्मा के नाम से अलग से पहचान बनाई है। इस केन्द्र में देश के विभिन्न राज्य ही नहीं बल्कि विदेशों से भी महिलाएं प्रशिक्षण लेने आती हैं। अंग्रेजी का विशेष ज्ञान नहीं होने के बावजूद विदेशी महिलाओं को सोलर उपकरण तैयार करने का प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाएं दे रही हैं। हाल ही 30 जुलाई को साउथ अफ्रीका से महिला, युवा और दिव्यांग विभाग गवर्नमेंट ऑफ साउथ अफ्रीका और फिक्की के सहयोग से 22 महिलाओं का एक दल सौर ऊर्जा का प्रशिक्षण प्राप्त करके गया है।

फैक्ट फाइल

96 देशों में अब तक सोलर ऊर्जा यह मुहिम पहुंची है, जहां अब सौलर का काम हो रहा है।
1700 विदेशी महिलाएं यहां आकर प्रशिक्षण ले चुकी हैं, वे अब सोलर उपकरण तैयार कर रही हैं।
1300 महिलाएं भारत देश के विभिन्न राज्यों की भी प्रशिक्षित हुई हैं।
100000 से अधिक लोग संस्थान का प्रतिवर्ष भ्रमण करने आते हैं।

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वर्ष 2009 में मिली मान्यता

2009 में भारत सरकार के (आईटेक) कार्यक्रम के तहत संस्था के इस ट्रेनिंग मॉडल को मान्यता मिली। सबसे पहले दुनिया के ऐसे गांवों का चयन किया गया जो कि बिजली की पहुंच से काफी दूर थे। उन गांवों का सर्वे करके कम पढ़ी-लिखी अथवा अनपढ़ ग्रामीण महिलाओं को सोलर प्रशिक्षण के माध्यम से बेयरफुट सोलर इंजिनियर बनाने के लिए तिलोनिया में 6 माह का प्रशिक्षण दिया गया। बाद में ये महिलाएं ‘बेयरफुट सोलर इंजिनियर’ के रूप में अपने गावों को रोशन कर पाई।

ये हैं सोलर मास्टर ट्रेनर

लीला देवी, मगन कंवर, माया देवी, उर्मिला शर्मा, लाड़ा देवी, फूलवंती, शहनाज़ आदि महिलाएं सोलर मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दे रही हैं।

सबसे पहले लद्दाख को किया सौलर से रोशन

संस्था ने वर्ष 1979 से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया। राष्ट्रीय स्तर पर सर्वप्रथम लद्दाख जैसे सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों को सोलर ऊर्जा से रोशन किया। इस सफलता के साथ आगे बढ़ते हुए वर्ष 2005 में अफगानिस्तान से आए प्रशिक्षु दल के साथ ही विदेशी प्रशिक्षण की शुरुआत हुई।

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क्या बोलीं हमारी ग्रामीण महिला इंजीनियर

मैं फलोदा गांव की रहने वाली हूं। में केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी लिखी हूं। मैं संस्था के साथ 2003 में जुड़ कर शुरुआत की, 6 माह का प्रशिक्षण हुआ जिसमे मुझे सोलर के बारे में सिखाया गया। इसके बाद मैं सोलर मास्टर ट्रेनर के रूप में सोलर ट्रेनिंग कार्यक्रम से जुडी। हम उन क्षेत्रों की महिलाओं को प्रशिक्षित करते है जहां आज भी बिजली की व्यवस्था नहीं है 7 हम उन महिलाओं को कलर कोडिंग से शुरुआत करते है और प्रैक्टिकल के माध्यम से ज्यादा सिखाते है।

लीला देवी, सौलर इंजीनियर

मैं बावड़ी गांव की हूं और तीसरी कक्षा तक पढ़ी लिखी हूं। मैं राजपूत समाज से हूं। संस्था से 2004 से जुडी। मेरा 6 माह का प्रशिक्षण हुआ जिसमें शुरुआत में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आज हमारी टीम मिलकर दुनिया के 96 देशों की महिलाओं को प्रशिक्षित कर चुकी है।

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मगन कंवर, सोलर इंजीनियर

इन देशों की महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण

मैक्सिको, पेरू, चिली, ब्राजील, ग्वाटेमाला, अर्जेटिना, क्यूबा, कोलंबिया, बोलिविया, मोरिटानिया, माली, सेनेगल, गांबिया, इथोपिया, टोगो, घाना, बेनिन, कैमरून, नामीबिया, जिम्बाब्वे, साउथ अफ्रीका, नाइजीरियाई, जॉर्डन, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, श्रीपीएनजी, किरिबाती, पलाऊ, माइक्रोनेशिया आलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, कंबोडिया, मलेशिया, फिलिपिंस आदि देशों की महिलाएं सौलर ऊर्जा का प्रशिक्षण ले चुकी हैं।