
RBSE exam fee income
अजमेर.
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को इस साल परीक्षा शुल्क के माध्यम से ही लगभग एक अरब 25 करोड़ रुपए की आय होगी। प्रमाण-पत्र व अंकतालिकाओं की प्रतिलिपि और पूरक परीक्षा शुल्क से करोड़ों रुपए की आय इसमें शामिल नहीं है।
अगले साल होने वाली सीनियर सैकंडरी और सैकंडरी परीक्षाओं के लिए फिलहाल आवेदन प्रक्रिया चल रही है। इन परीक्षाओं में लगभग साढ़े 19 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। शिक्षा बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले प्रत्येक नियमित विद्यार्थी से सामान्य परीक्षा शुल्क 600 रुपए वसूलता है। स्वयंपाठी विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा शुल्क 650 रुपए है। इसके अलावा आवेदन करने की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद विलम्ब शुल्क के साथ यह परीक्षा शुल्क दोगुना हो जाता है।
विलम्ब शुल्क से करोड़ों की आय
शिक्षा बोर्ड प्रति वर्ष सामान्य परीक्षा शुल्क की अंतिम तिथि और विलम्ब शुल्क के साथ आवेदन करने की अंतिम तिथि अलग अलग तय करता है। अनुमान के अनुसार सामान्य शुल्क के साथ आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद भी लगभग 70-80 हजार विद्यार्थी इसके बाद दोगुना परीक्षा शुल्क के साथ आवेदन करते है। शिक्षा बोर्ड को इससे भी करोड़ो रुपए की अतिरिक्त आय हो जाती है।
दस्तावेजों की प्रतिलिपि से भी करोड़ों की आय
बोर्ड की ओर से परीक्षाओं के प्रमाण-पत्र और अंकतालिकाओं की प्रतिलिपि भी जारी की जाती है। जानकारी के अनुसार प्रति वर्ष लाखों विद्यार्थी इसके लिए बोर्ड कार्यालय सहित राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित विद्याथी सेवा केन्द्रों पर आवेदन करते हैं। शिक्षा बोर्ड इसके लिए भी शुल्क वसूलता है। पूरक परीक्षाओं में भी लगभग सवा से डेढ़ लाख विद्यार्थी शामिल होते है। इन्हें परीक्षा में शामिल होने के लिए परीक्षा शुल्क का भुगतान करना होता है।
अब कॉलेज में होगा कॉन्वोकेशन..
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेज भी समारोह का आयोजन कर छात्र-छात्राओं को उपाधियां बांटेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय जल्द कॉलेज में पत्र भेजेगा। साथ ही उपाधियां भी तैयार कर भेजी जाएंगी। ताकि समय रहते कॉलेज विद्यार्थियों को समारोह की सूचना दे सके।
विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष विद्यार्थियों की उपाधियों को प्रबंध मंडल और विद्या परिषद से ग्रेस पास कर दीक्षान्त समारोह कराता रहा है। साथ ही विद्यार्थियों की उपाधियां समारोह के बाद कॉलेज में भेजने की परम्परा रही है। कॉलेज भी इन उपाधियों को अलमारी में बंद रखते हैं। छात्र-छात्राओं के कॉलेज आने पर उनसे निर्धारित शुल्क लेकर उपाधियां दी जाती हैं। कई विद्यार्थी तो दूरदराज इलाकों में नौकरी और व्यावसायिक व्यस्तता के चलते उपाधियां नहीं ले पाते। लिहाजा कुलाधिपति एवं राज्यपाल कल्याण सिंह ने कॉलेज स्तर भी उपाधियां बांटने के निर्देश दिए हैं।
Published on:
25 Sept 2018 08:51 am
