Ruin : चाहिए स्मार्ट ग्रीन और पॉली हाउस, हो सकती है नई रिसर्च

raktim tiwari

Updated: 16 Oct 2019, 08:15:00 AM (IST)

Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

शहर में स्मार्ट ग्रीन (green) और पॉली (polly) हाउस नहीं है। घूघरा पौधशाला में ये दोनों हाउस बर्बाद (ruin) हो चुके हैं। ग्रीन और पॉली हाउस ना केवल पौधों बल्कि शोधार्थियों-विद्यार्थियों के लिए मददगार हैं, लेकिन इन्हें सरकार (govt), जिला प्रशासन और वन विभाग (forest dept) गम्भीर नहीं है।

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घूघरा घाटी स्थित वन विभाग की पौधशाला बनी है। यहां बारिश (rain), सर्दी (winter) और ग्रीष्म (summer) ऋतु के दौरान नीम, करंज, अशोक, अमलताश, बोगनवेलिया और अन्य पौधे तैयार किए जाते हैं। राजस्थान वानिकी एवं विविधता परियोजना के तहत तत्कालीन वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री लक्ष्मी नारायण दवे ने वर्ष 2006 में उच्च तकनीकी पौधशाला का उद्घाटन किया था।

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कबाड़ हो चुके हैं दोनों हाउस
पर्यावरण (environment) बदलाव, बढ़ती गर्मी और तापमान (temprature) के चलते पेड़-पौधों पर असर पडऩे लगा है। पौधों को झुलसाती धूप और गर्मी से बचाने के लिए पौधशाला में ग्रीन और पॉली हाउस बनाए गए थे। विभाग ने शुरूआत में ग्रीन (green) और पॉली हाउस (polly house) का उपयोग किया। लेकिन 13 साल में यह कबाड़ हा चुके हैं। तेज हवा, तूफान और ओलावृष्टि के चलते ग्रीन और पॉली हाउस के नेट फट गए हैं। इनमें ड्रिप सिंचाई पद्धति भी बंद है।

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सरकार और अफसर बेपरवाह
अजमेर में वन विभाग का कहीं ग्रीन हाउस और पॉली हाउस नहीं है। जबकि यह पौधों के संरक्षण अैार उन्हें उचित वातावरण देने में सहायक है। सरकार (govt) और अफसर (official) इस नायाब पद्धति के प्रति बेपरवाह हैं। जबकि पुष्कर, गनाहेड़ा, अजमेर और इसके आसपास की निजी पौधशालाओं में ग्रीन हाउस और पॉली हाउस का उपयोग हो रहा है।

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ये हो सकता है उपयोग
-ग्रीन हाउस में पौधों का किया जा सकता है संरक्षण
-पॉली हाउस में प्राकृतिक वातावरण में रखे जा सकते हैं पौधे
-बॉटनी विषय के विद्यार्थियों को मिल सकती है शोध की नई संभावनाएं
-दुर्लभ पौधों को भी उगाया जा सकता है ग्रीन-पॉली हाउस में
-विभाग निजी पौधशाला की तरह तैयार कर सकता है विभिन्न प्रजातियों के पौधे

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वायरलैस सिस्टम भी बंद
विभाग ने इसी पौधशाला में करीब दस वर्ष पूर्व वायरलैस सिस्टम (wire less system)भी स्थापित किया था। यहां एन्टीना (antena) और कुछ उपकरण (equipments) लगाए गए। तेज अंधड़ और बरसात में वायरलैस सिस्टम का एन्टीना और उपकरण खराब हो गए। पिछले सात-आठ साल से यह सिस्टम भी बंद हो चुका है।


पौधों के ग्रीन हाउस और पॉली हाउस बहुत फायदेमंदर है। एक तो उन्हें हरा-भरा रखने के लिए प्राकृतिक वातावरण मिलता है। ड्रिप सिंचाई पद्धति से उन्हें पर्याप्त पानी उपलब्ध होता है। इन दोनों हाउस में बॉटनीकल रिसर्च हो सकती है। स्मार्ट सिटी में लोगों को कई दुर्लभ पौधे देखने और लगाने को मिल सकते हैं।
प्रो. अरविंद पारीक, विभागाध्यक्ष बॉटनी मदस विश्वविद्यालय

घूघरा पौधशाला में बदहाल हो चुके हैं दोनों हाउस। शोधार्थियों-विद्यार्थियों को मिल सकती है मदद।

रक्तिम तिवारी/अजमेर. शहर में स्मार्ट ग्रीन और पॉली हाउस नहीं है। घूघरा पौधशाला में ये दोनों हाउस बर्बाद हो चुके हैं। ग्रीन और पॉली हाउस ना केवल पौधों बल्कि शोधार्थियों-विद्यार्थियों के लिए मददगार हैं, लेकिन इन्हें सरकार, जिला प्रशासन और वन विभाग गम्भीर नहीं है।
घूघरा घाटी स्थित वन विभाग की पौधशाला बनी है। यहां बारिश, सर्दी और ग्रीष्म ऋतु के दौरान नीम, करंज, अशोक, अमलताश, बोगनवेलिया और अन्य पौधे तैयार किए जाते हैं। राजस्थान वानिकी एवं विविधता परियोजना के तहत तत्कालीन वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री लक्ष्मी नारायण दवे ने वर्ष 2006 में उच्च तकनीकी पौधशाला का उद्घाटन किया था।

कबाड़ हो चुके हैं दोनों हाउस
पर्यावरण बदलाव, बढ़ती गर्मी और तापमान के चलते पेड़-पौधों पर असर पडऩे लगा है। पौधों को झुलसाती धूप और गर्मी से बचाने के लिए पौधशाला में ग्रीन और पॉली हाउस बनाए गए थे। विभाग ने शुरूआत में ग्रीन और पॉली हाउस का उपयोग किया। लेकिन 13 साल में यह कबाड़ हा चुके हैं। तेज हवा, तूफान और ओलावृष्टि के चलते ग्रीन और पॉली हाउस के नेट फट गए हैं। इनमें ड्रिप सिंचाई पद्धति भी बंद है।

सरकार और अफसर बेपरवाह
अजमेर में वन विभाग का कहीं ग्रीन हाउस और पॉली हाउस नहीं है। जबकि यह पौधों के संरक्षण अैार उन्हें उचित वातावरण देने में सहायक है। सरकार और अफसर इस नायाब पद्धति के प्रति बेपरवाह हैं। जबकि पुष्कर, गनाहेड़ा, अजमेर और इसके आसपास की निजी पौधशालाओं में ग्रीन हाउस और पॉली हाउस का उपयोग हो रहा है।

ये हो सकता है उपयोग
-ग्रीन हाउस में पौधों का किया जा सकता है संरक्षण
-पॉली हाउस में प्राकृतिक वातावरण में रखे जा सकते हैं पौधे
-बॉटनी विषय के विद्यार्थियों को मिल सकती है शोध की नई संभावनाएं
-दुर्लभ पौधों को भी उगाया जा सकता है ग्रीन-पॉली हाउस में
-विभाग निजी पौधशाला की तरह तैयार कर सकता है विभिन्न प्रजातियों के पौधे

वायरलैस सिस्टम भी बंद
विभाग ने इसी पौधशाला में करीब दस वर्ष पूर्व वायरलैस सिस्टम भी स्थापित किया था। यहां एन्टीना और कुछ उपकरण लगाए गए। तेज अंधड़ और बरसात में वायरलैस सिस्टम का एन्टीना और उपकरण खराब हो गए। पिछले सात-आठ साल से यह सिस्टम भी बंद हो चुका है।


पौधों के ग्रीन हाउस और पॉली हाउस बहुत फायदेमंदर है। एक तो उन्हें हरा-भरा रखने के लिए प्राकृतिक वातावरण मिलता है। ड्रिप सिंचाई पद्धति से उन्हें पर्याप्त पानी उपलब्ध होता है। इन दोनों हाउस में बॉटनीकल रिसर्च हो सकती है। स्मार्ट सिटी में लोगों को कई दुर्लभ पौधे देखने और लगाने को मिल सकते हैं।
प्रो. अरविंद पारीक, विभागाध्यक्ष बॉटनी मदस विश्वविद्यालय

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